हमारी नानी का आंगन(Nani ka aangan ),
सच में नानी की तरह महान है ,
नानी के घर में हमारी क्या शान है,
वहाँ माँ के नाम से हमारी होती पहचान है,
नानी के घर जाकर माँ,
बिल्कुल बेपरवाह होकर घुमती है,
नानी माँ बार-बार हमारा माथा चुमती है,
हमारे घर के जैसे नानी के घर में,
हमारा नाम नहीं चलता है,
उस घर में हर किसी की जुबान से,
सिर्फ हमारी माँ का नाम निकलता है,
वहाँ की गलियों की मिट्टी में गूंजता है,
हमारी माँ का नाम है,
हमारी नानी का आंगन(Nani ka aangan ),
सच में नानी की तरह महान है ,
नानी के घर में हमारी क्या शान है,
वहाँ माँ के नाम से हमारी होती पहचान है,
* * * *
माँ जब भी जाती है नानी के घर,
दुपट्टा नहीं रखती है माँ अपने सर,
घर-घर जाती है अपने बचपन की,
सखी-सहेलियों से मिलने,
बचपन का प्यार उमड़ पड़ता है उनके दिल में,
अपनी सखी-सहेलियों से हंसते-हंसते,
अपने पुराने दिनों को याद करते-करते,
सारा दिन गुजार देती है,
नानी के घर जाकर माँ नहीं देखती,
क्या फायदा क्या नुकसान है,
हमारी नानी का आंगन(Nani ka aangan ),
सच में नानी की तरह महान है ,
नानी के घर में हमारी क्या शान है,
वहाँ माँ के नाम से हमारी होती पहचान है,
* * *
अपने गुड्डे-गुड़ियों की बातें करती हैं,
अपनी बचपन की नादानियों को,
याद कर-करके,सब मिलकर हंसती हैं,
नानी माँ राह देखती रहती है,
बार-बार सुनेहे भेजती रहती है,
समय से खाना खाने के लिए,
नानी माँ तैयार रहती हैं ,
हमें खेत-खलिहान दिखाने के लिए,
हमारी छोटी से छोटी चीज का,
नानी माँ रखती ध्यान है,
हमारी नानी का आंगन(Nani ka aangan ),
सच में नानी की तरह महान है ,
नानी के घर में हमारी क्या शान है,
वहाँ माँ के नाम से हमारी होती पहचान है,
* * * *
पापा को भी बुलाते हैं मेरी माँ का नाम लेकर,
पापा जब बैठते हैं नहा-धोकर,
नानी माँ उनके लिए तीनों पहर,
नए-नए पकवान बनाती है,
नानी माँ को अकेला काम करते हुए देखकर,
फिर माँ उनका हाथ बंटाती है,
सच में,मेरी नानी माँ के हाथों में जादू है,
वो लाजवाब बनाती पकवान है,
हमारी नानी का आंगन(Nani ka aangan ),
सच में नानी की तरह महान है ,
नानी के घर में हमारी क्या शान है,
वहाँ माँ के नाम से हमारी होती पहचान है,
* * * *
नानी का आंगन(Nani ka aangan ) : माँ के नाम की खुशबू

खाना,नहाना और सोना,
माँ बस ये ही करती काम है,
नानी माँ बार-बार दुआएं देती है माँ को,
ससुराल में सबकी जुबान पर रहे,
मेरी बृजबाला का नाम है,
नानी माँ के घर मैं जब भी जाती हूँ,
उनकी जेब से नए-नए नोट निकलवाती हूँ,
नानी माँ एक नोट निकालकर,
अपने हाथ जोड़ लेती है,
फिर हमें खेलने के लिए आंगन में छोड़ देती है,
पैसा,नानी माँ की सच में जान है,
हमारी नानी का आंगन(Nani ka aangan ),
सच में नानी की तरह महान है ,
नानी के घर में हमारी क्या शान है,
वहाँ माँ के नाम से हमारी होती पहचान है,
* * * *
नानी माँ बिल्कुल मेरी बड़ी माँ की तरह है,
सारे घर में पीपल की छाँव की तरह है,
नानी माँ रात को कहानियां भी सुनाती है,
मेरी माँ को अपने पास बैठाती है,
वो पूछती रहती है हमारे घर का हाल-चाल,
सब-कुछ ठीक चल रहा है ना,
हर दिन हंसते-मुस्कुराते निकल रहा है ना,
क्या मायके जैसा है बिल्कुल तेरा ससुराल,
क्या वैसा ही है तेरा ससुराल हूबहू,
जैसा सुना था उसका गुणगान है,
हमारी नानी का आंगन(Nani ka aangan ),
सच में नानी की तरह महान है ,
नानी के घर में हमारी क्या शान है,
वहाँ माँ के नाम से हमारी होती पहचान है,
* * * *
नानी माँ प्यार से फेरतीं है हमारे सर पर हाथ,
हमारे ऊपर उड़ेलती है प्यार दिन-रात,
नानी माँ मुझे शैतान बताती है,
मुझे बोलती रहती है तूं ज्यादा शोर मचाती है,
इस घर में चलता मेरा हुक्म है,
ये तुम्हारी बड़ी माँ का घर नहीं है,
शोर-शराबा,थोडा कम करना होगा,
हर दिन आराम से रहना होगा,
तुम जानते नहीं हो शायद,
तुम्हारी नानी माँ बड़े शांत स्वभाव की इंसान हैं,
हमारी नानी का आंगन(Nani ka aangan ),
सच में नानी की तरह महान है ,
नानी के घर में हमारी क्या शान है,
वहाँ माँ के नाम से हमारी होती पहचान है,
* * * *
creation -राम सैणी
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