(mannat ka dhaga)

मन्नत का धागा (mannat ka dhaga) : ममता की ताकत

मन्नत का धागा (mannat ka dhaga) : ममता की ताकत

आज फल मिला है मेरी वर्षों की मन्नत का
तूं है मेरी मन्नत का धागा (mannat ka dhaga) ,
मेरी हर मन्नत में तेरा ज़िक्र है,
इस माँ ने जैसा मांगा था वैसा पाया है,
उस रब का लाख-लाख शुक्र है,
एक धागा तेरी लंबी उम्र का,
मैंने बांधा है पीपल के पेड़ पर,
जहाँ सब औरतें उस पीपल को चूम रही थी,
उसके चारों ओर घूम रही थी,
सच में कोई मुकाबला नहीं है,
एक माँ की हिम्मत का,
आज फल मिला है मेरी वर्षों की मन्नत का
तूं है मेरी मन्नत का धागा (mannat ka dhaga) ,
मेरी हर मन्नत में तेरा ज़िक्र है,
इस माँ ने जैसा मांगा था वैसा पाया है,
उस रब का लाख-लाख शुक्र है,
* * * * *
सारे जहां की दौलत-शौहरत,
तेरी हंसी पर कुर्बान है,
मेरी ज़मीं भी तूं है,
तूं ही मेरा आसमान है,
जब चले तूं राहों में सीना तानकर,
तेरे सर से बहे ठंडी हवा,
मेरी आँख़ों की चमक है तूं,
मेरे दिल में धडकती धड़कन है तूं ,
तुम से खूबसूरत इस जहां में,
इस माँ के लिए कोई और है क्या,
तुम को इस जहां में लाने के लिए,
तुम को रब से पाने के लिए,
ये सर हर सुबह उसकी चौखट पर है झूका,
तूं फल है मेरी वर्षो की तपस्या का,
सच में बहुत पक्का होता है,
एक माँ का सब्र है,
आज फल मिला है मेरी वर्षों की मन्नत का
तूं है मेरी मन्नत का धागा (mannat ka dhaga) ,
मेरी हर मन्नत में तेरा ज़िक्र है,
इस माँ ने जैसा मांगा था वैसा पाया है,
उस रब का लाख-लाख शुक्र है,
* * * * *
एक धागा अपने घर की ‌चौखठ पर,
मैंने बांधा है लाल कपड़े में लपेटकर,
तुम्हारे पैदा होने की खुशी में,
मैंने एक मन्नत उतारी है जमीं पर लेटकर,
मेरे इस सुने जीवन में,
तूं लाया है लाखों खुशियां समेटकर ,
तेरे लिए मन्नतों का पिटारा,
तेरी माँ ने खोल रखा है,
तूं टुकड़ा है मेरे जिगर का,
मैंने हर बुरी बला को बोल रखा है,
तुझे छूने से पहले मुझ से टकराना होगा,
तुम्हारी राह रोकने से पहले ,
इस माँ को बताना होगा,
तूं हल है मेरी हर समस्या का,
बाज से भी तेज तुम्हारी माँ की नजर है,
आज फल मिला है मेरी वर्षों की मन्नत का
तूं है मेरी मन्नत का धागा (mannat ka dhaga) ,
मेरी हर मन्नत में तेरा ज़िक्र है,
इस माँ ने जैसा मांगा था वैसा पाया है,
उस रब का लाख-लाख शुक्र है,

*     *     *      *     *     *

मन्नत का धागा (mannat ka dhaga) : माँ की आस्था

 

(mannat ka dhaga)
(mannat ka dhaga)

एक काले धागे में मोती पिरोकर,
मैंने बांधें हैं तुम्हारे दोनों हाथों में,
मिट्टी के दीये से काली स्याही बनाकर,
मैंने डाली है तुम्हारी आँखों में,
एक काला टीका तुम्हारे कान के पीछे,
मैं लगाना नहीं भूलती हूँ,
तूं रहे सदा फूलों के जैसे खिला-खिला,
ये मन्नत मै हर रोज रब से मांगतीं हूँ,
मेरी उस रब से ये ही है कामना,
तूं धनी बनकर रहें सदा अपनी किस्मत का,
आज फल मिला है मेरी वर्षों की मन्नत का
तूं है मेरी मन्नत का धागा (mannat ka dhaga) ,
मेरी हर मन्नत में तेरा ज़िक्र है,
इस माँ ने जैसा मांगा था वैसा पाया है,
उस रब का लाख-लाख शुक्र है,
* * * * *
अपनी माँ की हर बात पर गौर करना,
जब सोएगा रात को गहरी नींद में,
ये चाँद-सा मुख हमेशा,
अपनी माँ की ओर करना ,
तेरी माँ के तरस रहे हैं कान कब से,
तूं हर रोज अपनी मीठी-मीठी,
किलकारियों का शोर करना,
तूं है मेरा एक मीठा सपना,
तुम्हारी एक छोटी सी मुस्कान,
इस माँ के दिल पर करती गहरा असर है,
आज फल मिला है मेरी वर्षों की मन्नत का
तूं है मेरी मन्नत का धागा (mannat ka dhaga),
मेरी हर मन्नत में तेरा ज़िक्र है,
इस माँ ने जैसा मांगा था वैसा पाया है,
उस रब का लाख-लाख शुक्र है,
* * * * *
creation-राम सैणी
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