एक बेटी के आ जाने से,
आज सबके चेहरे उतरें हैं क्यूं,
बेटी है तो बहू है ( beti hai to bahoo hai ),
बेटी नहीं चाहिए किसी को,
फिर क्यों ढूंढते फिरते हो,
परियों जैसी खूबसूरत बहू,
काश ये दस्तूर चल पड़े,
अमीर हो या गरीब,छोटे हों चाहे बड़े,
बेटी बिन बहू ना मिले,
बिन दान-दहेज के,बेटी की डोली उठे,
बेटी ही घर की असली खुशबू,
एक बेटी के आ जाने से,
आज सबके चेहरे उतरें हैं क्यूं,
बेटी है तो बहू है ( beti hai to bahoo hai ),
* * * *
घर में बेटी क्या आई,
सबके चेहरे का रंग लाल हो गया,
जो बांटते फिरते थे दुसरो को नसीहत ,
आज उनका बुरा हाल हो गया,
घर में जैसे बादल गमों के छा गए हैं,
सबके चेहरों से यूं लगता है,
जैसे कोई जीती हुई बाजी हार गए हैं,
उस माँ से पूछना जिसने दर्द सहा है,
बिन बेटी के बहू कहां है,
जिस रास्ते पर सब चलते हैं
मैं तो थोडा उससे हट कर चलता हूँ,
एक बेटी के आ जाने से,
आज सबके चेहरे उतरें हैं क्यूं,
बेटी है तो बहू है ( beti hai to bahoo hai ),
बेटी नहीं चाहिए किसी को,
फिर क्यों ढूंढते फिरते हो,
परियों जैसी खूबसूरत बहू,
* * * *
हर आदमी के चेहरे से,
खुशी गायब हो गई,
जैसे उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया हो,
घर में सबकी आँखें नम थी,
परेशानी ज्यादा और खुशी कम थी,
हर आदमी को बोलनें का
जैसे कोई बहाना मिल गया हो,
शायद ये ही जमाने का चलन था,
मैल दिलों में आज भी है,
मैल दिलों में कल भी था,
बेटी की आने की खुशी में,
मीठा किया ना किसी ने मुंह,
एक बेटी के आ जाने से,
आज सबके चेहरे उतरें हैं क्यूं,
बेटी है तो बहू है ( beti hai to bahoo hai ),
बेटी नहीं चाहिए किसी को,
फिर क्यों ढूंढते फिरते हो,
परियों जैसी खूबसूरत बहू,
* * * *
बेटी ही किसी के घर की बहू बनेगी,
वो दो खानदानों को जोड़ने की कड़ी बनेंगी,
बेटी ही एक दिन किसी के घर की,
खुशियों की लडी बनेंगी,
जहाँ बेटी के पड़ते हैं शुभ कदम,
उस घर में रहती है खुशियों की सरगम,
बेटी को खुश रखना फर्ज हमारा है,
बेटी भी आँखों का तारा है,
बेटी बिन ना चले सृष्टि,
बेटी के लिए बदलिए अपनी दृष्टि,
बेटी जरूरी है भाई की सूनी कलाई के लिए
उसके बिना सूना है हर त्योहार,
बेटी है एक जिम्मेदारी,
उसके बिना अधूरा है भाई-बहन का प्यार,
माँ की सहेली है बेटी,
पिता की है आरजू,
एक बेटी के आ जाने से,
आज सबके चेहरे उतरें हैं क्यूं,
बेटी है तो बहू है ( beti hai to bahoo hai ),
बेटी नहीं चाहिए किसी को,
फिर क्यों ढूंढते फिरते हो,
परियों जैसी खूबसूरत बहू,
* * * * *
बेटी है तो बहू है ( beti hai to bahoo hai ) : समाज का कड़वा सच

माँ की तरह जिम्मेदारी उठाती हैं बेटी,
उसकी तरह रिश्ते निभाती हैं बेटी,
माँ की ही परछाई है बेटी,
बेटी है तो बहू है,
अपने हिस्से का लेकर आई है बेटी,
बेटी चाँद जैसी होगी तो,
बहू भी चांद जैसी मिलेगी,
बेटी ही वो प्यारा फूल है,
जो किसी बेगाने घर में जाकर खिलेगी,
बहूं का सम्मान क्यों जरूरी है,
ये एक बेटी के आने के बाद समझ आएगा,
बहू को भी बेटी के जैसे तकलीफ होती है,
ये एक बेटी के आने के बाद समझ आएगा,
बहू भी बेटी ही होती है हू-ब-हू,
एक बेटी के आ जाने से,
आज सबके चेहरे उतरें हैं क्यूं,
बेटी है तो बहू है ( beti hai to bahoo hai ),
बेटी नहीं चाहिए किसी को,
फिर क्यों ढूंढते फिरते हो,
परियों जैसी खूबसूरत बहू,
* * * *
आज जमाना बदल रहा है,
हर कोई नई सोच के साथ चल रहा है,
आज बेटी को खूब सम्मान मिल रहा है,
जिसकी वो हकदार भी है,
नफ़रत थोड़ी कम हुई है,
धूल दिलों पर जैसे जम गई है,
आज उसको भी बेटों के बराबर रखा जाता है,
ये उसका अधिकार भी है,
बेटी नहीं आएगी घर में,
फिर कहाँ से लाओगे बहूं,
एक बेटी के आ जाने से,
आज सबके चेहरे उतरें हैं क्यूं,
बेटी है तो बहू है ( beti hai to bahoo hai ),
बेटी नहीं चाहिए किसी को,
फिर क्यों ढूंढते फिरते हो,
परियों जैसी खूबसूरत बहू,
* * * *
creation – राम सैणी
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