pahli bar chhuaa

जब माँ ने मुझे पहली बार छूआ ( pahli bar chhuaa ) : पहली नज़र

मेरी किलकारियां मुस्कान में बदल गई,
जब माँ ने मुझको पहली बार छूआ ( pahli bar chhuaa )  था,
मेरे जन्म के साथ-साथ उस दिन,
माँ का भी नया जन्म हुआ था ,
पहली बार जब देखी ये दुनिया,
सब अनजाने लोग थे मेरे आस-पास,
हर चेहरा था मध्यम दर्जे का,
बस मेरी माँ का चेहरा था सबसे खास,
मेरे बेनाम जीवन को एक नया नाम दिया था,
जब माँ ने मुझको पहली बार छूआ था,
मेरी किलकारियां मुस्कान में बदल गई,
जब माँ ने मुझको पहली बार छूआ ( pahli bar chhuaa )था,
मेरे जन्म के साथ-साथ उस दिन,
माँ का भी नया जन्म हुआ था ,
* * * * *
माँ बार-बार मुझे चूमती रही,
टकटकी लगाकर मुझे देखती रही,
जैसे मैं उसकी वर्षों की तपस्या था,
वो बिन बोले समझ रही थी मेरे दिल की हलचल,
अपने सीने की गर्माहट दे रही थी,मुझे हर पल,
वो मुझे प्यार कर रही थी,
मुझसे बातें कर रही थी,
मेरे लिए ये सब बिल्कुल नया-नया था,
मेरी किलकारियां मुस्कान में बदल गई,
जब माँ ने मुझको पहली बार छूआ( pahli bar chhuaa ) था,
मेरे जन्म के साथ-साथ उस दिन,
माँ का भी नया जन्म हुआ था ,
* * * * *
प्यार तो माँ कोख में भी मुझे कर रही थी,
लेकिन ‌आज का दिन सबसे अलग था,
वो मुझे एक न‌ए कपड़े में लपेटे हुई थी,
माँ मुझे अपने सीने से लगाकर लेटे हुई थी,
मैं अपने अंगूठे को चूस रहा था,
मैं बार-बार माँ की ओर झुक रहा था,
मैं देख रहा था उसके चेहरे के हाव-भाव को,
मैं कोख में ही महसूस कर रहा था,
ममता की इस अनमोल छाँव को,
मेरी रग-रग में जोश भर गया था,
जब मैंने पहली बार माँ का दूध पिया था,
मेरी किलकारियां मुस्कान में बदल गई,
जब माँ ने मुझको पहली बार छूआ ( pahli bar chhuaa )था,
मेरे जन्म के साथ-साथ उस दिन,
माँ का भी नया जन्म हुआ था ,
* * * * *
मैं सारा दिन खेलता रहा,
अपने पैरों को इधर-उधर चलाता रहा,
माँ मुझे देखकर मुस्करा रही थी,
उसके चेहरे पर जैसे दीपों का उजाला था,
मैं कितना किस्मत वाला था,
इस जादुई चेहरे को देखकर,
मैं ईश्वर का शुक्रगुजार था,
माँ की गोद ईश्वर का चमत्कार था,
मैं खुश था ईश्वर का ये चमत्कार देखकर,
ये चमत्कार मेरे जीवन में पहली बार हुआ था,
मेरी किलकारियां मुस्कान में बदल गई,
जब माँ ने मुझको पहली बार छूआ ( pahli bar chhuaa ),
मेरे जन्म के साथ-साथ उस दिन,
माँ का भी नया जन्म हुआ था ,
* * * * *

जब माँ ने मुझे पहली बार छूआ ( pahli bar chhuaa ) : एक साथ दो जन्म

 

pahli bar chhuaa
pahli bar chhuaa

 

माँ मुझे बार-बार देख रही थी,
अपने प्यारे हाथों से उठाकर,
वो अपने अनमोल आंचल में,
मुझे रखती थी सबसे छुपाकर,
माँ जैसा कोई नहीं है वो सबको बता देती है,
माँ अपनी जान दांव पर लगा देती है,
अपनी गोद को हरा-भरा करनें के लिए,
माँ लोरी सुनकर मैं पहली बार,
चैन की नींद सोया था,
जब माँ ने मुझको पहली बार छुआ था,
मेरी किलकारियां मुस्कान में बदल गई,
जब माँ ने मुझको पहली बार छूआ ( pahli bar chhuaa )था,
मेरे जन्म के साथ-साथ उस दिन,
माँ का भी नया जन्म हुआ था ,
* * * * *
मेरे चारों ओर प्रार्थनाओं का,
माँ ने एक घेरा बना दिया था,
माँ ने अपनी प्रार्थनाओं की शक्ति से,
मेरा औंरा बढा दिया था,
मेरे चेहरे की लाली माँ के चेहरे पर,
साफ-साफ नजर आ रही थी ,
माँ हर रात मीठी-मीठी लोरियां,
मुझे गाकर सुना रही थी,
माँ के प्यार का मीठा-मीठा एहसास हुआ था,
जब माँ ने मुझको पहली बार छुआ था,
मेरी किलकारियां मुस्कान में बदल गई,
जब माँ ने मुझको पहली बार छूआ ( pahli bar chhuaa )था,
मेरे जन्म के साथ-साथ उस दिन,
माँ का भी नया जन्म हुआ था ,
* * * * *
creation -राम सैणी
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