janmdin

बेटी का जन्मदिन ( janmdin ) : इंतज़ार का दिन

मेरा जन्मदिन ( janmdin ) कब आएगा ,
घर में खुशियों का माहोल कब छाएगा,
चुप क्यों हो बोलों ना बड़ी माँ,
क्या न‌ए कपड़े न‌ए खिलोने,
सबसे आशीर्वाद मिलेगा,
क्या मेरे जन्मदिन पर भी,
सबका चेहरा फूलों के जैसे खिलेगा,
चुप क्यों हो बोलों ना बड़ी माँ,
घर में न‌ई-न‌ई मिठाईयां बनेंगी,
तरह-तरह के पकवान,
क्या मुझको भी इस प्यारे घर में,
बेटों के जैसे मिलेगा खूब सम्मान,
मेरे हाथों में रंग-बिरंगी चूड़ियां पहनाने,
चुडी वाला कब आएगा ,
चुप क्यों हो बोलों ना बड़ी माँ,
* * * * *
आज जमाना बदल गया है,
बेटी पर गुस्सा दिखाना बदल गया है,
बेटियों को आजकल शेरनी बुलाते हैं,
आपकी पीठ की सवारी करने का मेरा मन है,
बच्चों का मन होता निर्मल है,
कुछ लोग बेटियों को घर में,
प्यार से तितली कहकर बुलाते हैं,
मुझे देखकर मेरे पापा हर घड़ी मुस्कराते हैं,
मेरे जन्मदिन का सारा खर्च,
अब की बार आपको उठाना होगा,
चुप क्यों हो बोलो ना बड़ी माँ,
मेरा जन्मदिन (janmdin ) कब आएगा ,
घर में खुशियों का माहोल कब छाएगा,
चुप क्यों हो बोलों ना बड़ी माँ,
* * * * *
धीरे-धीरे बदल रही है बड़ी माँ,
पुराने जमाने की परम्परा,
अब बेटियों को भी मात-पिता,
अपने दिल में देने लगें हैं जगह,
आज खिले मन से बेटियों का,
हर ओर स्वागत होने लगा है,
आज चाऱो ओर संसार में,
बेटियों की हिफाजत होने लगी है,
मेरे माथे पर तिलक,हाथों में धागा कब बांधोगी
चुप क्यों हो बोलों ना बड़ी माँ,
मेरा जन्मदिन (janmdin ) कब आएगा ,
घर में खुशियों का माहोल कब छाएगा,
चुप क्यों हो बोलों ना बड़ी माँ,
* * * * *
जमाना चाहे कितना ही बदल गया हो,
चाहे कितना ही कर लें लोक-दिखावा,
बेटियां कल भी पराया धन थी,
वो आज भी हैं धन पराया,
तूं ज्यादा मत उड़ आसमान में,
अच्छा खाती है अच्छा पहनती हैं,
बताओ जरा अपनी बड़ी माँ को,
क्या कमी रखी है तुम्हारे सम्मान में,
तूं बेटी है बेटी के जैसा रहना सीख,
जुबां नर्म,आँखों में शर्म,
प्यार से पेश आना सीख,
तुम को कुछ बोलती हूँ तो ,
नाराज हो जाते हैं तुम्हारे पापा,
इसलिए चुप है तुम्हारी बड़ी माँ,
मेरा जन्मदिन (janmdin ) कब आएगा ,
घर में खुशियों का माहोल कब छाएगा,
चुप क्यों हो बोलों ना बड़ी माँ,
* * * * *

बेटी का जन्मदिन ( janmdin ) : एक छोटी सी उम्मीद

 

 

 janmdin
janmdin

कुछ ज्यादा ही लाढ-लढाते हैं तुम्हारे पापा,
कुछ ज्यादा ही हवा में उड़ाते हैं तुम्हारे पापा,
मैंने तो कभी देखा नहीं है,
किसी को बेटियों का जन्मदिन मनाते हुए,
मैंने तो कभी सुना नहीं है,
किसी को बेटियों को तितली बुलाते हुए,
लाली तुम्हें मेरे अनुसार चलना होगा,
मुझे से पूछे बिना लाली,
तुम्हें घर से बाहर नहीं निकलना होगा,
क्या ये सब हो पाएगा,
चुप क्यों हो बोलों ना लाली अब हाँ,
मेरा जन्मदिन (janmdin ) कब आएगा ,
घर में खुशियों का माहोल कब छाएगा,
चुप क्यों हो बोलों ना बड़ी माँ,
* * * * *
बड़ी माँ तुम को शायद पता नहीं है,
मैं मानतीं हूँ बेटियां होती है थोड़ी खर्चीली,
इससे बेटियों की कोई खता नहीं है,
तुम छोटी-छोटी बातों में ,
मुझसे उलझा मत करो,
हर वक्त घर की बेटी से हंसकर मिला करो,
इसी बहाने कुछ दान-पुण्य हो जाएगा,
आपके शुभ हाथों से,
लेकिन मुझे ऐसा लगता नहीं है आपकी बातों से,
अबकी बार बड़ी माँ दिला देना,
मुझे कपड़े रंग-बिरंगें,
चुप क्यों हो बोलों ना बड़ी माँ,
मेरा जन्मदिन (janmdin ) कब आएगा ,
घर में खुशियों का माहोल कब छाएगा,
चुप क्यों हो बोलों ना बड़ी माँ,
* * * * *
बड़ी माँ आने वाला है वो शुभ दिन,
जब आएगा मेरा जन्मदिन,
पापा लेकर आएंगे हवा के गुब्बारे,
रंग-बिरंगे खेल-खिलौने भी,
पापा सारे घर में सजावट करेंगे,
खूब मस्ती करेंगे हम दोनों ही,
बड़ी माँ आपको ज्यादा बाहर का खाना नहीं है,
आपकों शाय़द मेरा जन्मदिन मनाना नहीं है,
चलो ठीक है आप मुझे दे देना एक नोट गुलाबी,
मेरे हाथ लग जाएगी उस दिन खुशियों की चाबी,
बड़ी माँ क्या आप से ऐसा हो पाएगा,
चुप क्यों हो बोलों ना बड़ी माँ,
मेरा जन्मदिन (janmdin ) कब आएगा ,
घर में खुशियों का माहोल कब छाएगा,
चुप क्यों हो बोलों ना बड़ी माँ,
* * * * *
creation -राम सैणी
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