माँ का संसार (maa ka sansar): बेटा और बेटी
मैंने बेटे को आँचल में छूपाकर पाला है, तो बेटी को भी अपनी जान से ज्यादा संभाला है, मैं […]
मैंने बेटे को आँचल में छूपाकर पाला है, तो बेटी को भी अपनी जान से ज्यादा संभाला है, मैं […]
मैंने बचपन में देखा था पापा जैसा बनने का सपना ( papa jaisa banne ka sapna ) उसके जैसा
हमारी खुशियों के दो किनारे (khushiyon ke do kinare )हैं, ये ही सुख-दुख के साथी हमारे हैं, जीवन में खुशियाँ
हर चीज का हिसाब मांगती बेटी(Hisab mangti beti)है आपकी, हर बात का जवाब मांगती है बेटी आपकी, क्या ये
दौलत-शोहरत कदम चूमती है, जिस आंगन में बेटियां खेलती हैं, बंद किस्मत के द्वार ( kismat ke dwar ) खोलती
बातें करता हूँ नापतोल कर, अपने से बड़ों को बुलाता हूँ जी बोलकर, प्यार से बोलना मेरा स्वभाव है
हर पल तुम्हारा चेहरा नजर आता है माँ, मुस्कराती हुई हर माँ (muskrati hui har maa ) को देखकर, मुझे
मेरे सपनों को पंख लगाए कौन, मेरी ओर हाथ अपना बढ़ाए कौन, पापा बिन कौन सुनेगा ( papap bin kaun
मेरी किलकारियां मुस्कान में बदल गई, जब माँ ने मुझको पहली बार छूआ ( pahli bar chhuaa ) था, मेरे
माँ हर रोज तड़फाती है पेट की भूख( pet ki bhookh) , हर रोज दौड़ाती है पेट की भूख, कंई