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मेरे पापा जितना अमीर ( mere papa jitna amir )

मेरे पापा जितना अमीर ( mere papa jitna amir ) : असली अमीरी

मैंने छोड़ दिया है ढूंढना हाथों में,
किस्मत की लकीर को,
मैंने एक से बढ़कर एक देखे हैं दुनिया में,
शायद ही कोई मेरे पापा जितना अमीर ( mere papa jitna amir ) हो,
*         *           *          *          *           *           *            *
जब कोई रास्ता नहीं दिखता है,
पापा से उम्मीद है फिर आखरी,
मुझे यूं सीने से लगाकर रखतें हैं,
जैसे मैं हूँ कान्हा की प्यारी बांसुरी ,
मैंने एक रोज पापा को यूं ही बोल दिया था,
भेद अपने मन का यूं ही खोल दिया था,
पापा मुझे आसमान के सितारे बहुत भाते हैं,
मैं क्या देखती हूँ पापा काम से लौटते वक्त,
उसी श्याम सितारों से जड़ा हुआ,
एक प्यारा दुपट्टा लेकर आते हैं,
हर चीज मेरे कदमों में डाल देते हैं,
चाहे पापा की पहूँच से कितनी ही दूर हो,
मैंने छोड़ दिया है ढूंढना हाथों में,
किस्मत की लकीर को,
मैंने एक से बढ़कर एक देखे हैं दुनिया में,
शायद ही कोई मेरे पापा जितना अमीर ( mere papa jitna amir ) हो,
*         *           *          *          *           *           *            *
पापा मेरे माथे को चूमते हुए बोले,
जिस चीज पर मेरी प्यारी गुड़िया,
अपने रखेगी छोटे-छोटे हाथ,
वो चीज तुम्हारे कदमों में होगी,
फिर मैं दिन देखुंगा ना रात,
मैंने पूछा लिया बड़ी माँ से एक दिन,
क्या दुनिया में मेरे पापा जैसे होते हैं,
सब बच्चों के पापा,
वो जैसे मुझे प्यार करते हैं ,
क्या ऐसे ही प्यार करते हैं सब बच्चों के पापा,
बड़ी माँ बोली तुमने पिछले जन्म में जरूर,
मोती दान किए होंगे किसी फकीर को,
मैंने छोड़ दिया है ढूंढना हाथों में,
किस्मत की लकीर को,
मैंने एक से बढ़कर एक देखे हैं दुनिया में,
शायद ही कोई मेरे पापा जितना अमीर ( mere papa jitna amir ) हो,
*         *           *          *          *           *           *            *
एक दिन फिर से मैंने हंसते-हंसते बोल दिया,
पापा रात मेरे सपने में एक परी आई थी,
वो नजारा क्या कमाल था,
उसके चेहरे का रंग लाल था,
वो चलती थी छम-छम करती हुई,
बस मैंने इतना क्या बोला,
पापा ने झट से दरवाजा खोला,
श्याम को मेरे पैरों में चांदी की पायल थी,
मैं जहाँ भी रखती थी कदम,
उस सपने वाली परी के जैसे,
मेरी पायल भी करती थी छम-छम,
मैं डालकर रखतीं हूँ पैरों में चांदी की पायल,
गले में एक चमकतीं जंजीर को,
मैंने छोड़ दिया है ढूंढना हाथों में,
किस्मत की लकीर को,
मैंने एक से बढ़कर एक देखे हैं दुनिया में,
शायद ही कोई मेरे पापा जितना अमीर ( mere papa jitna amir ) हो,
*         *           *          *          *           *           *            *

मेरे पापा जितना अमीर ( mere papa jitna amir ) : मेरी सबसे बड़ी दौलत 
 
मेरे पापा जितना अमीर ( mere papa jitna amir )
मेरे पापा जितना अमीर ( mere papa jitna amir )
 

पापा फिर से मेरे माथे को चूमते हुए बोले,
जो भी निकलेगा जब भी निकलेगा,
मेरी प्यारी गुड़िया की जुबान से,
मैं उसे पूरा करुंगा जी-जान से,
मैंने पापा को प्यार करते हुए बोला,
आपके हाथों में जादू है क्या,
मैंने आपसे जो भी जब भी मांगा है,
आप पल में ले आते हो राम जाने किस तरह,
पापा ने दो बार चूमा फिर गले से लगाया,
मेरी एक मुस्कराती हुई तस्वीर को,
मैंने छोड़ दिया है ढूंढना हाथों में,
किस्मत की लकीर को,
मैंने एक से बढ़कर एक देखे हैं दुनिया में,
शायद ही कोई मेरे पापा जितना अमीर ( mere papa jitna amir ) हो,
*         *           *          *          *           *           *            *
मैंने बड़ी माँ से कंई किस्से सुने थे जादुगर के,
जो अपने जादू से कुछ भी कर सकता है,
मेरे प्यारे पापा बिल्कुल वैसे ही हैं,
पलक झपकते ही सब सपने अपने हो जाएं,
जो सपने में देखूं वो हकीकत बन जाए,
मेरे प्यारे पापा बिल्कुल वैसे ही हैं,
पापा सिर्फ मेरा ही नहीं,
घर में सबका खयाल रखते हैं,
पापा सिर्फ मुझे ही नहीं,
घर में सबको खुशियों से मालामाल रखते हैं,
पापा तो पापा ही होते हैं,
वो साहुकार हों चाहे मजदूर हो,
मैंने छोड़ दिया है ढूंढना हाथों में,
किस्मत की लकीर को,
मैंने एक से बढ़कर एक देखे हैं दुनिया में,
शायद ही कोई मेरे पापा जितना अमीर ( mere papa jitna amir ) हो,
*         *           *          *          *           *           *            *
मेरे पापा की झोली में खुशियां के रंग,
डाल देना तमाम जी,
मैं आपसे कुछ और नहीं मांगती हे राम जी,
हमारे चेहरे की लाली है वो,
बड़ी माँ है घनी छाँव का पेड़,
उस प्यारे पेड़ की हरी-हरी डाली है वो,
वो हम सबको सीने में बसाकर रखतें हैं,
वो हम सबको पलकों पर बिठाकर रखतें हैं,
मैं हर सुबह चूमती हूँ मंदिर की सीढ़ियां,
सौ-सौ बार धन्यवाद देती हूँ अपनी तकदीर को,
मैंने छोड़ दिया है ढूंढना हाथों में,
किस्मत की लकीर को,
मैंने एक से बढ़कर एक देखे हैं दुनिया में,
शायद ही कोई मेरे पापा जितना अमीर ( mere papa jitna amir ) हो,
*         *           *          *          *           *           *            *

creater- राम सैनी

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