माँ कभी रूठती नहीं ( maa kabhi roothati nahin ) : हमेशा साथ
आसमान धरती पर आ जाए, चाहे रात में सूरज उग जाए, माँ कभी रूठती नहीं ( maa kabhi roothati nahin
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आसमान धरती पर आ जाए, चाहे रात में सूरज उग जाए, माँ कभी रूठती नहीं ( maa kabhi roothati nahin
माँ मिलती है किस बाजार में, वो बचपन की मीठी लोरी ( bachpan ki meethi lori ), मैं उसे
माँ बहुत कठीन है जीवन की डगर, मुझे फिर से अपनी बाहों में पकड़, माँ मुझे फिर से थाम
आसमानी परी नहीं बेटी तूं मर्दानी है, शक्ति का अवतार ( shakti ka avtar ) है तूं, फूल नहीं
चलो एक मन्नत ( ek mannat ) मांग लेते हैं, अपनी-अपनी माँ के लिए, वो चैन की नींद सोए सदा,
मैं जब डोली ( Doli ) में बैठूंगी पिता जी, मुझे हंसकर आप विंदा करना , हम कैसे सुख-दुख बांटा
परिवार के मंगल के लिए, भुखे रह जाने की शक्ति, एक माँ के सिवा और किस में है, माँ
माँ बाजार से लाई थी एक दुपट्टा ( ek duptta ) मोतियों से जड़ा, उसे रखती थी बहुत संभालकर, उस
माँ की यादें ( maa ki yaaden ) अब मेरा जीवन, बुझा-बुझा सा रहता है अब मेरा मन, मेरा
बेटी के लिए भी खुले रखना द्वार माँ, अपने दिल के भी अपने घर के भी, मुझे भी करना