मेरी कोख के जाये का सवाल था,
शायद ये नए ख़ून का उबाल था,
माँ बताओ तुम्हारे एहसान है कितने,
मैं बोली धीरे से मुस्कराकर,
बारिश की बूंदें ( barish ki boonden )हैं जितनी,
गिन सकते हो तो गिन लो,
रिमझिम करती बारिश की बूंदों को,
नीले गगन में चमकते एक-एक सितारें को,
दिल धड़कता है सीने में,मेरे जितनी बार,
मैंने प्यार किया है तुम को,
शायद उससे भी ज्यादा बार,
मेरे हर बार छूने से होता था,
तेरे चेहरे का रंग लाल था,
मेरी कोख के जाये का सवाल था,
माँ बताओ तुम्हारे एहसान है कितने,
मैं बोली धीरे से मुस्कराकर,
बारिश की बूंदें ( barish ki boonden )हैं जितनी,
* * * *
माँ के एहसानों की गिनती करना,
इतना आसान नहीं है,
सीने में चलती सांसों की गिनती करना,
इतना आसान नहीं है,
माँ कभी गिनकर प्यार नहीं करती है,
बेवजह चूम लेती है माथे को,
काले काजल से सजाकर रखती हैं,
माँ हर घड़ी हमारी आँखों को,
माँ बताओ तुम मेरे लिए जागी हो रातें कितनी,
मेरी कोख के जाये का सवाल था,
शायद ये नए ख़ून का उबाल था,
माँ बताओ तुम्हारे एहसान है कितने
मैं बोली धीरे से मुस्कराकर,
बारिश की बूंदें ( barish ki boonden )हैं जितनी,
* * * *
माँ की ममता का सागर,
हर घड़ी छलकता है,
माँ की प्रार्थनाओं का बादल,
हर घड़ी बरसता है,
कोई कमी नहीं होती कभी प्यार की,
दीवानो की तरह चाहने वाली माँ की ओर से,
उसके दिल की धड़कन बढ़ जाती थी,
जब सारा आंगन गूंजता था,
तुम्हारी किलकारियों के शोर से ,
तुम्हारे आस-पास बुन रखा था,
अपनी ममता का जाल था,
मेरी कोख के जाये का सवाल था,
माँ बताओ तुम्हारे एहसान है कितने,
मैं बोली धीरे से मुस्कराकर,
बारिश की बूंदें ( barish ki boonden )हैं जितनी,
* * * *
बारिश की बूंदें और मेरे एहसान,
दोनों हैं एक समान,
बारिश की बूंदों को कोई गिन नहीं सका,
ना ही कोई गिन सका माँ के एहसान,
चैन से सोना क्या होता है,
मैं तो जैसे भूल गई थी,
पेट भरकर खाना-पीना,
मैं तो जैसे भूल गई थी,
तुम क्या जानो माँ की ममता,
मैं कैसे बताऊं तुम्हें दुनिया में लाने के लिए,
मैंने भूखें पेट रहकर दिन गुजारे हैं कितने,
मेरी कोख के जाये का सवाल था,
माँ बताओ तुम्हारे एहसान है कितने,
मैं बोली धीरे से मुस्कराकर,
बारिश की बूंदें ( barish ki boonden )हैं जितनी,
* * * *
बारिश की बूंदें ( barish ki boonden ) जैसा माँ का प्यार : माँ का प्रेम अथाह है

तेरी सूरत देखकर जीने लगी थी,
तुम्हें खुश होता देखकर,
मैं भी खुश होने लगी थी,
तेरे जीवन को रौशन करना,
बस मेरा एक ही काम था,
तुम्हें आराम से खेलता देखकर,
बस मेरा ये ही आराम था,
अब समय से पहले खुद से चलने लगा था,
अपने खिलोनों से खेलने लगा था,
जब तूं हुआ था एक साल का,
मेरी कोख के जाये का सवाल था,
माँ बताओ तुम्हारे एहसान है कितने,
मैं बोली धीरे से मुस्कराकर,
बारिश की बूंदें ( barish ki boonden )हैं जितनी,
* * * *
मैंने यूं ही पूछ लिया था मजाक में,
मुझे माफ करना माँ,
आंसू आ गए तुम्हारी आँख में,
मुझे माफ करना माँ,
ये अनमोल रिश्ता है प्यार का माँ,
मैं इस प्यार का सदा कर्जदार रहूंगा,
लोग बोलते हैं उस ऊँचे आसमान वाले को ईश्वर,
मै तो तुम्हें ही ईश्वर कहूंगा,
तुम्हारा उम्रभर सम्मान करुंगा,
इस जिस्म में सांसें हैं बाकी जितनी,
मेरी कोख के जाये का सवाल था,
माँ बताओ तुम्हारे एहसान है कितने,
मैं बोली धीरे से मुस्कराकर,
बारिश की बूंदें ( barish ki boonden )हैं जितनी,
* * * *
तेरा आंचल ही मेरा घर है,
तेरे बिना जीना बहुत मुश्किल है,
तूं फूल है प्यार के बगीचे का,
तेरे चेहरे पर दिव्य ज्योति है,
माँ-बेटे के रिश्ते जैसा दूसरा रिश्ता ना कोई,
माँ तो बस माँ ही होती है,
माँ तेरे एहसान है कितने ये पूछना,
बस मेरा एक कोरा ख्याल था,
मेरी कोख के जाये का सवाल था,
माँ बताओ तुम्हारे एहसान है कितने,
मैं बोली धीरे से मुस्कराकर,
बारिश की बूंदें ( barish ki boonden )हैं जितनी,
* * * *
creation -राम सैणी
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