श्याम तक काम करते-करते,
माँ की पीठ थकावट से टूटी होती है,
शनिवार हो या रविवार,धूप हो या छाँव,
माँ की कोई नहीं छुट्टी होती है
उसको मिलता नहीं कोई आराम,
एक-एक मेडल (ek medel) हम सबकी माँ के नाम,
हमारे परिवार का आधार है माँ,
हमारी सच्ची पहरेदार है माँ,
बिन रुके बिन झुके हमेशा चलती रहती है,
माँ की जिंदगी हर दिन यूं ही गुजरती रहती है,
वो सलामत रहे हमेशा,वो स्वस्थ रहे हमेशा,
एक प्रार्थना हर रोज,हम सबकी माँ के नाम,
माँ की कोई नहीं छुट्टी होती है
उसको मिलता नहीं कोई आराम,
एक-एक मेडल (ek medel)हम सबकी माँ के नाम,
* * * * *
शरीर साथ दे या ना दें,मन हो या ना हो,
लेकिन मांँ चलती रहती है,
नींद आँखों में लेकर,हम सबको साथ लेकर,
माँ हर पल चलती रहती है,
सप्ताह में जब आता है छुट्टी का दिन रविवार,
माँ के कांधों पर होता है सबसे ज्यादा बार,
हम सबकी फरमाईसे पूरी करते-करते,
श्याम तक थक जाती है माँ,
हम सबको खुश करते-करते,
श्याम तक थोड़ा-थोड़ा रुक जाती है माँ,
वैसे तो रुठना माँ का स्वभाव नहीं है,
अपनी माँ को प्यार से मनाइए,
जब कभी भी माँ थोडा रुठी होती है,
शनिवार हो या रविवार,धूप हो या छाँव,
माँ की कोई नहीं छुट्टी होती है
उसको मिलता नहीं कोई आराम,
एक-एक मेडल (ek medel)हम सबकी माँ के नाम,
* * * * *
किसी को गर्म पानी तो किसी को ठंडा चाहिए,
किसी को त्रिकोण परांठे पसंद हैं तो ,
किसी को गोल-गोल चाहिए,
हम सबके दिल का हाल जान ले,
सबसे तेज़ होती है माँ के नयनों की ज्योति,
परिवार को भरपेट खिलाकर,
माँ के हिस्से आती है ठंडी रोटी,
नानी के घर में हमारी पहचान होती है,
लेकर हमारी प्यारी माँ का नाम,
श्याम तक काम करते-करते,
माँ की पीठ थकावट से टूटी होती है,
शनिवार हो या रविवार,धूप हो या छाँव,
माँ की कोई नहीं छुट्टी होती है
उसको मिलता नहीं कोई आराम,
एक-एक मेडल (ek medel)हम सबकी माँ के नाम,
* * * * *
कोई माँ के लिए तैयार रहें या ना रहे,
लेकिन मांँ हम सबके लिए हमेशा तैयार रहती है,
कोई माँ का हाल-चाल पुछे या ना पुछे,
लेकिन मांँ हर घड़ी पुछती रहती है,
एक सपना,हजार प्रार्थनाएं,
दिल में प्रीत बसती हैं,
वो हमें हंसता-खेलता देखकर,
फूलों के जैसे खिल जाती है,
कहाँ से आती है इतनी शक्ति,
तुम दिनभर रहती हो चलती,
मेरी माँ जैसा कोई नहीं है,
माँ को लिपट जाएं ये बोलकर,
कभी-कभी माँ का मन बहलाएं,
उसके चारों ओर घूमकर,
सारे घर में गूंजे एक ही नाम,
माँ कैसे कर लेती हो इतना काम,
उसको मिलता नहीं कोई आराम,
एक-एक मेडल (ek medel)हम सबकी माँ के नाम,
* * * * *
माँ के नाम एक-एक मेडल (ek medel) : माँ है तो घर है

वो प्यार करें हद से ज्यादा,
हमारी चिंता करें हद से ज्यादा,
हमारी एक छोटी सी आह! पर,
माँ अंदर तक हिल जाती है,
जब देख लें हमारे चेहरे पर सूरज की लाली,
मानो माँ को सच्ची खुशी मिल जाती है,
आज से एक-एक सुख कीजिए,
अपनी जीवन देने वाली माँ के नाम,
श्याम तक काम करते-करते,
माँ की पीठ थकावट से टूटी होती है,
शनिवार हो या रविवार,धूप हो या छाँव,
माँ की कोई नहीं छुट्टी होती है
उसको मिलता नहीं कोई आराम,
एक-एक मेडल (ek medel)हम सबकी माँ के नाम,
* * * * *
सीधे मुंह माँ से,हर रोज बात कीजिए,
माँ कितना काम करती हो,
क्या तुम कभी नहीं थकती हो,
ऐसी जादुई बातें माँ से हर रात कीजिए,
कभी छूकर देखना माँ के करामाती हाथों को,
कभी गौर से देखना माँ के पास बैठकर,
प्यार के दो मीठे बोल सुनने को तरसती,
उनकी जादुई आँखों को,
छोटे-छोटे कामों में माँ की मदद कीजिए,
माँ के जीवन से कुछ सबक लीजिए,
कुछ कीमती पल बिताना जीवन के,
माँ के साथ फुर्सत से बैठकर,
उनके साथ कभी अपने मन की कहना,
कभी माँ के मन की सुनना दिल खोलकर,
अपनी जादुई बातों से देना,
माँ को प्यार का पैगाम,
उसको मिलता नहीं कोई आराम,
एक-एक मेडल (ek medel)हम सबकी माँ के नाम,
* * * * *
माथे पर लगाएं उनकी चरणों की धूल को,
उसके बोलने से पहले ही झुक जाएं,
जब भी कभी छोटी-मोटी भूल हो,
माँ की डांट-फटकार का अमृत,
यहाँ हर किसी को नहीं मिलता,
माँ के लाड़-प्यार का अमृत,
यहाँ हर किसी को नहीं मिलता,
वो पल में जोश भर देती है रग-रग में,
जब हमारी हिम्मत टूटी होती है,
श्याम तक काम करते-करते,
माँ की पीठ थकावट से टूटी होती है,
शनिवार हो या रविवार,धूप हो या छाँव,
माँ की कोई नहीं छुट्टी होती है
उसको मिलता नहीं कोई आराम,
एक-एक मेडल (ek medel)हम सबकी माँ के नाम,
* * * * *
Creater -राम सैणी
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