(sachcha  parameshvar)

पिता ही मेरा सच्चा परमेश्वर(sachcha  parameshvar)

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जो हमारे अंदर संस्कारों का बीज बोता है,
हमारी जिद्द को अपना फर्ज मानकर निभाता है,
पति से पहले पिता ही सच्चा परमेश्वर (sachcha  parameshvar) होता है,
पति का परमेश्वर होना तो, किस्मत की बात है,
लेकिन पिता हम सबका परमेश्वर ही होता है,
पति हमारी ताल के साथ ताल मिलाकर,
चलने वाला मिल जाए तो ये क़िस्मत की बात है,
लेकिन पिता हमेशा हमारी ताल के साथ ताल मिलाकर चलने वाला ही होता है,
हम जागते हैं तो पिता जागता है,
जो हमें सोता देखकर फिर सोता है,
पति से पहले पिता ही सच्चा परमेश्वर होता है,
जो हमारे अंदर संस्कारों का बीज बोता है,
हमारी जिद्द को अपना फर्ज मानकर निभाता है,
पति से पहले पिता ही सच्चा परमेश्वर(sachcha  parameshvar) होता है,
*        *          *         *          *          *
सारी उम्र मिलता रहता है बिना शर्त,
पिता परमेश्वर का साथ,
वो खुशियों का पिटारा खोल कर रखता है,
हमारे लिए दिन-रात,
हर रोज हमारी एक न‌ई फरमाईस,
हम शुरू हो जाते हैं पिता के घर आते ही,
हमे पता है वो पूरी करेगा,
हम थोडा सा भी शरमाते नहीं,
पिता निस्वार्थ अपने बच्चों पर
सारा जीवन न्योछावर कर देता है,
जो हमारे अंदर संस्कारों का बीज बोता है,
हमारी जिद्द को अपना फर्ज मानकर निभाता है,
पति से पहले पिता ही सच्चा परमेश्वर (sachcha  parameshvar) होता है,
*        *          *         *          *          *
हमारे लिए वो चादर से भी बाहर,
अपने पैर निकाल लेता है,
वक्त कैसा भी हो पिता के लिए,
वो खुद को वक्त के अनुसार ढाल लेता है,
हर फ़रमाई पुरी कर देता है पिता,
हमारे होंठों पर आने से पहले,
एक हाथ में खाने का डिब्बा,
एक हाथ में हमारी मनचाही चीज़ ले आता है,
पिता श्याम ढलने से पहले,
जो बिना पंखों के हमें ,
ऊँचे आसमान में उडाता है,
पति से पहले पिता ही सच्चा परमेश्वर होता है,
जो हमारे अंदर संस्कारों का बीज बोता है,
हमारी जिद्द को अपना फर्ज मानकर निभाता है,
पति से पहले पिता ही सच्चा परमेश्वर (sachcha  parameshvar) होता है,
*        *          *         *          *          *
मैं क्यों ना अभिमान करूं,
अपने पिता परमेश्वर पर,
मैं क्यों ना विश्वास करूं,
अपने पिता परमेश्वर पर, वो
एक शेरनी को पालने की जुर्रत,
एक शेर पिता ही कर सकता हैं ,
एक शेरनी को संभालने की जुर्रत,
एक शेर पिता ही कर सकता है,
मेरे नाज-नखरे रहते हैं,
आसमान के सितारों से ज्यादा,
मैंने न‌ए-न‌ए शौंक पाल रखे हैं,
आसमान में उडते परींदों से ज्यादा,
परिवार का भार अपने कांधों पर,
पिता उठाता इकलौता है,
जो हमारे अंदर संस्कारों का बीज बोता है,
हमारी जिद्द को अपना फर्ज मानकर निभाता है,
पति से पहले पिता ही सच्चा परमेश्वर (sachcha  parameshvar) होता है,
*        *          *         *          *          *

पिता ही मेरा सच्चा परमेश्वर (sachcha  parameshvar) : जीवन का आधार

(sachcha  parameshvar)
(sachcha  parameshvar)

मैं बोलती रहती हूँ पिता सुनता रहता है,
वो मेरे सर पर हाथ रखकर,
बस थोडा सा मुस्कुरा देता है,
गुस्सा हद से ज्यादा है,
समय से पूरा होना चाहिए,
मुझसे किया हुआ हर वादा है ,
पिता मेरे गुस्से को भी अपनी शक्ति बना लेता है
पति से पहले पिता ही सच्चा परमेश्वर होता है,
जो हमारे अंदर संस्कारों का बीज बोता है,
हमारी जिद्द को अपना फर्ज मानकर निभाता है,
पति से पहले पिता ही सच्चा परमेश्वर (sachcha  parameshvar)होता है,
*        *          *         *          *          *
माँ तो फिर भी डांट देती है,
पिता को तो जैसे डांटना,आता ही नहीं,
मा तो फिर भी गुस्सा करती है,
पिता को तो जैसे गुस्सा करना,आता ही नहीं,
मैं हमेशा सुनती रहती हूँ,
संगीत पिता की सादगी का,
हम रहें हमेशा आसमान की बुलंदियों पर,
बस ये ही मकसद है पिता की जिंदगी का,
वो फूलों की तरह सदा अपनी खुशबू देता है,
जो हमारे अंदर संस्कारों का बीज बोता है,
हमारी जिद्द को अपना फर्ज मानकर निभाता है,
पति से पहले पिता ही सच्चा परमेश्वर (sachcha  parameshvar) होता है,
*        *          *         *          *          *
उपकार कितने हैं पिता के,
मैं गिनाऊं तो गिनाऊं कैसे,
मेरे लिए मेरे पिता क्या है,
मैं सबको बताऊं तो बताऊं कैसे,
पिता के दिल में हमारी,
सबसे उपर जगह है,
वो ही तो हमारी चेहरे पर,
एक प्यारी-सी मुस्कान की वजह होता है,
पति से पहले पिता ही सच्चा परमेश्वर होता है,
जो हमारे अंदर संस्कारों का बीज बोता है,
हमारी जिद्द को अपना फर्ज मानकर निभाता है,
पति से पहले पिता ही सच्चा परमेश्वर (sachcha  parameshvar)होता है,
*        *          *         *          *          *
Creater- राम सैणी
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