(pita bhi insan hai)

पिता भी इंसान हैं(pita bhi insan hai) : बरसता हुआ पिता

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पिता बरसता है तो बरस लेने दो
दिल हलका हो जाएगा ,
थम जाएगा उनके पिता के भीतर का तूफ़ान,
पिता भी इंसान हैं(pita bhi insan hai),
आज सूरज की तरह तप रहा है
तो कोई बात नहीं
कल चाँद की तरह शीतल हो जाएगा,
जो दिल में छूपा है बवंडर,
अनसुलझे सवालों और नाराजगी का,
आज खाली हो जानें दो,
आज उफ़ान मारती दरिया की तरह,
मत रोको,उसे बह जाने दो,
एक बार फिर से वो ही ,
उजाला,आने वाले कल का हो जाएगा,
पिता बरसता है तो बरस लेने दो
दिल हलका हो जाएगा ,
* *      *       *       *         *
मैंने देखे हैं भीगते कपड़े उनके तन के,
कंई बार गलती से खोलें हैं,
पिता ने तार अपने मन के,
मैं पूछता गया हर बार,
थोड़े और खोलो अपने मन के द्वार,
धीरे-धीरे सही पर खुल रहे थे,
वो बोलते जा रहे थे बिन रुके,
कभी शायद किसी ने पूछा ना होगा,
हंसी के पीछे का दर्द देखा ना होगा,
शायद मुझ पर बरस कर आज,
दर्द कम उनके दिल का हो जाएगा,
पिता बरसता है तो बरस लेने दो
दिल हलका हो जाएगा ,
थम जाएगा उनके पिता के भीतर का तूफ़ान,
पिता भी इंसान हैं(pita bhi insan hai),
* *      *       *       *         *
मैंने जब धीरे से छूआ,
उनके खुरदुरे हाथों को,
पिता मुझे देखकर ठंडी कर रहे थे ,
अपनी तपती आँखों को ,
वो दूर से लगता है खारा समंदर,
जब पास बैठकर देखोगे तो,
वो समंदर मीठे जल का हो जाएगा,
पिता बरसता है तो बरस लेने दो
दिल हलका हो जाएगा ,
थम जाएगा उनके पिता के भीतर का तूफ़ान,
पिता भी इंसान हैं(pita bhi insan hai),
आज सूरज की तरह तप रहा है
तो कोई बात नहीं
कल चाँद की तरह शीतल हो जाएगा,
* *      *       *       *         *
परिवार को खुशियां देने वाला,
खुद खुशियों की तलाश में है,
आज का दिन कैसा बीता है,
भुख से उसका कैसा रिश्ता है,
शायद कोई तो पूछेगा,
पिता रहता इसी आस में है,
अपनी-अपनी दुनिया में सब खोए हैं,
तारों से खिली हुई रात में,
बेखौप होकर चैन से सब सोए हैं,
रातभर जागता है एक अकेली जान है,
पिता बरसता है तो बरस लेने दो
दिल हलका हो जाएगा ,
थम जाएगा उनके पिता के भीतर का तूफ़ान,
पिता भी इंसान हैं(pita bhi insan hai),
* *      *       *       *         *

पिता भी इंसान हैं(pita bhi insan hai) :  पिता का भारी दिल

 

(pita bhi insan hai)
(pita bhi insan hai)

 

ना जाने कब नींद आ गई आँखों में,
खुद से बातें करते-करते,
आधी से ज्यादा जिंदगी जी ली है,
अकेले जिंदगी की राहों में चलते-चलते,
समंदर की उठती लहरों की तरह,
आज अंतर्मन में एक हलचल सी है,
चारों ओर का शोर तो कुछ शांत है,
लेकिन अनसुलझे सवालों की एक दलदल सी है,
ये जिंदगी है कर्मों का मेला,
यहाँ हिसाब हर पल का हो जाएगा,
पिता बरसता है तो बरस लेने दो
दिल हलका हो जाएगा ,
थम जाएगा उनके पिता के भीतर का तूफ़ान,
पिता भी इंसान हैं(pita bhi insan hai),
आज सूरज की तरह तप रहा है
तो कोई बात नहीं
कल चाँद की तरह शीतल हो जाएगा,
* *      *       *       *         *
जितना मैंने महसूस किया है,
मैं लिखता जा रहा हूँ,
एक पिता के जैसे रिश्ते निभाना,
हर दिन सीखता जा रहा हूँ,
माँ हो या फिर पिता हो,
रिश्तों में सदा पवित्रता हो,
अपने घर का सदा मजबूत स्तंभ बनकर रहीए,
अपने माता-पिता की पहली पसंद बनकर रहीए ,
पिता से ही जुडी हमारी पहचान है,
पिता बरसता है तो बरस लेने दो
दिल हलका हो जाएगा ,
थम जाएगा उनके पिता के भीतर का तूफ़ान,
पिता भी इंसान हैं(pita bhi insan hai),
* *      *       *       *         *
फुरसत के कुछ पल निकाल कर,
सीखो शहद घोलना रिश्तों में,
जीना है तो खुलकर जिओ,
क्या जीना है किश्तों में,
जिंदगी की उलझनों को,
कोई साथ हो सुलझाने वाला,
उंगली थामे पिता हो,
परेशानियों को हराने वाला,
जब साथ हों रिश्तों को निभाने वाले तो,
हर दिन खुशियों भरी महफिल सा हो जाएगा,
पिता बरसता है तो बरस लेने दो
दिल हलका हो जाएगा ,
थम जाएगा उनके पिता के भीतर का तूफ़ान,
पिता भी इंसान हैं(pita bhi insan hai),
आज सूरज की तरह तप रहा है
तो कोई बात नहीं
कल चाँद की तरह शीतल हो जाएगा,
* *      *       *       *         *
Creater -राम सैणी
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