सारे जहां से खुशियां चुराकर,
मैं भर देता बेटी के माथे की लकीरों में,
उसके नसीब में सिर्फ खुशियाँ ( sirf khushiyan ) होती,
यदि नशीब बिकता बाजारों में,
सबके पहले खरीदता मैं बाज़ार से,
तेरे चेहरे की प्यारी सी मुस्कान,
तेरी प्यारी सी मुस्कान देखकर,
झूमने लगता है ये सारा आसमान,
बेटी हर पल मुस्कराती हुई नजर आनी चाहिए,
घर में हो चाहे तस्वीरों में,
सारे जहां से खुशियां चुराकर,
मैं भर देता बेटी के माथे की लकीरों में,
उसके नसीब में सिर्फ खुशियाँ ( sirf khushiyan ) होती,
यदि नशीब बिकता बाजारों में,
* * * *
तेरी आँखों की चमक ले आऊंगा,
मैं बाजार में हर मोल चुकाकर,
ये चमक हमेशा कायम रहे,
इसलिए तेरे कानों के पीछे रखूंगा,
मैं एक काला टीका लगाकर,
तेरे चेहरे की मुस्कुराहट बताएगी,
तेरे जीवन में खुशियों के पैमाने को,
बेटी की खुशी ही सबसे उपर होती है,
ये बताना चाहता हूँ मैं जमाने को,
हर वक्त खुशियां दिखनी चाहिए,
उसके नयनों के दो सितारों में,
सारे जहां से खुशियां चुराकर,
मैं भर देता बेटी के माथे की लकीरों में,
उसके नसीब में सिर्फ खुशियाँ ( sirf khushiyan ) होती,
यदि नशीब बिकता बाजारों में,
* * * *
खुशियां दस्तक देंगी घर की दहलीज पर,
जब तुम सुबह-सुबह सोकर उठोगी,
ये बहती हुई ठंडी हवाएं,
हमारे आंगन में आकर रुकेंगी,
सुख के मोती बिखरे होंगे,
तुम्हारे जीवन में चारों ओर,
ठंडे झरनों का पानी,
तुम्हारे पाँव को धोने आएगा,
हर दिन करता हुआ मीठा-मीठा शोर,
तुम्हारी दौलत-शोहरत की चर्चा होगी,
आसमानी सितारों में,
सारे जहां से खुशियां चुराकर,
मैं भर देता बेटी के माथे की लकीरों में,
उसके नसीब में सिर्फ खुशियाँ ( sirf khushiyan ) होती,
यदि नशीब बिकता बाजारों में,
* * * *
बेटी को मान-सम्मान मिले भरपूर,
उसका मायका हो या ससुराल,
घर में चले उसकी सरकार,
उसका मायका हो या ससुराल,
मैं बाजार से खरीद लाऊंगा,
बेटी के लिए एक जादू की छड़ी,
जो उसके पास रहेगी हर घड़ी,
उस छड़ी का काम होगा,
हमारी बेटी की हिफाजत करना,
घर के हर काम में खूब बरकत करना,
सौ-बार सोचें आंसू,
उसकी आँखों में आने से पहले,
हर बार राय ली जाए हमारी बेटी की,
घर में कोई भी सामान लाने से पहले,
उसका चेहरा रहे खुशी से खिला-खिला,
आने वाले हर छोटे-बड़े त्योंहारों में,
सारे जहां से खुशियां चुराकर,
मैं भर देता बेटी के माथे की लकीरों में,
उसके नसीब में सिर्फ खुशियाँ ( sirf khushiyan ) होती,
यदि नशीब बिकता बाजारों में,
* * * *
तेरे नसीब में सिर्फ खुशियाँ ( sirf khushiyan ) : मेरी राजकुमारी की मुस्कान

अपनी बेटी का नशीब खुद लिखता,
काश एक पिता को मौका मिल जाए,
अपनी बेटी के हिस्से में,
सुनहरे पल खुद लिखता,
काश एक पिता को मौका मिल जाए,
उसके हाथों में हो रिश्तों की मजबूत डोर,
सच्चे रिश्ते ही असली गहना हैं,
हर पल रहें खुशी से चमकते ,
उसके प्यारे-प्यारे दो नयना हैं,
शयानी बेटी फैलाती है खुशबू,
अपने प्यार की दो परिवारों में,
सारे जहां से खुशियां चुराकर,
मैं भर देता बेटी के माथे की लकीरों में,
उसके नसीब में सिर्फ खुशियाँ ( sirf khushiyan ) होती,
यदि नशीब बिकता बाजारों में,
* * * *
बेटी के हाथ रहे उसके जीवन की चाबी,
उसके चेहरे पर छाई रहे मुस्कान गुलाबी,
चाँद-सितारों में चर्चे आम हों,
सारे जहां की खुशियां उसके नाम हों,
घर दीपों से जगमग हो,
उसके मुस्कराते ही,
खुशियां ही खुशियां फैल जाएं हर कोने में,
हमारी बेटी को गले लगाते ही,
ईश्वर करे वो हर पल नहाती रहे,
खुशियों की बोछारों में,
सारे जहां से खुशियां चुराकर,
मैं भर देता बेटी के माथे की लकीरों में,
उसके नसीब में सिर्फ खुशियाँ ( sirf khushiyan ) होती,
यदि नशीब बिकता बाजारों में,
* * * *
creation – राम सैणी
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