google.com, pub-4922214074353243 , DIRECT, f08c47fec0942fa0
पत्थर पर लकीर (patthar par lakeer)

पत्थर पर लकीर (patthar par lakeer) : माँ का आदेश

 

मै थोड़ा बोलता हूँ ज्यादा सुनता हूँ,
सपने रंग-बिरंगे मन मैं बुनता हूँ,
माँ की वजह से मेरा चमका नशीब है
वो हर घड़ी मेरे दिल के करीब है,
माँ का आदेश पत्थर पर लकीर (patthar par lakeer) है,
उसकी वजह से चमक उठी मेरी तकदीर है,

*         *         *          *
हमारे जीवन की माँ है सारथी,
खाना खाती है मारकर पालती,
ये ही अंदाज उस के मन को भाता है,
शुक्र करें माँ हरदम रब का,
चेहरे पर नूर छाया रहे सब का,
अपनी प्रार्थनाओं की शक्ति से,
घर को स्वर्ग बनाया है,
वो बोल-कबोल ना बोले कभी,
किसी बात पर जब वो अडी,
फिर ना पीछे कदम बढ़ाया है,
उसके चेहरे पर मुस्कान के बादल छा जातें हैं,
मैं जब भी गले मिलता हूँ,
मै थोड़ा बोलता हूँ ज्यादा सुनता हूँ,
सपने रंग-बिरंगे मन मैं बुनता हूँ,
माँ की वजह से मेरा चमका नशीब है
वो हर घड़ी मेरे दिल के करीब है,
माँ का आदेश पत्थर पर लकीर (patthar par lakeer) है,
उसकी वजह से चमक उठी मेरी तकदीर है,
* * * * *
हर काम करें मुस्कराकर,
मुझे रखती है सच की राह दिखाकर,
कोई नाप-तोल ना जाने माँ,
वक्त के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना,
जीवन में हालातों के साथ लडना,
बच्चों को ही अपनी दौलत माने माँ,
जो राहें हैं टेढ़ी-मेढ़ी मैं उन्हीं राहों को चुनता हूँ
मै थोड़ा बोलता हूँ ज्यादा सुनता हूँ,
सपने रंग-बिरंगे मन मैं बुनता हूँ,
माँ की वजह से मेरा चमका नशीब है
वो हर घड़ी मेरे दिल के करीब है,
माँ का आदेश पत्थर पर लकीर (patthar par lakeer) है,
उसकी वजह से चमक उठी मेरी तकदीर है,
* * * * *
रिमझिम करते हैं जब-जब बादल,
बिजली भी गरजती है आधी रात में,
जब हम डरकर उठ जाते थे,
माँ बांहों का घेरा बनाकर सुला देती है,
हम सबको अपने साथ में,
मेरे बच्चों संग खेलती रहती है माँ,
एक छोटे से बच्चे की तरह,
माँ उनका कवछ बनकर रहती है सदा ,
एक कंगारू के बच्चे की तरह,
माँ का आसरा है ऐसा,
जैसे अंधियारे में एक जलता दीया हो,
माँ का ख्याल रखने की डोर सौंप रखी है,
मैंने अपनी मंझली बेटी दिव्य को,
वो दौड़ी -दौडी आती है,
मैं जब भी उसको बोलता हूँ,
मै थोड़ा बोलता हूँ ज्यादा सुनता हूँ,
सपने रंग-बिरंगे मन मैं बुनता हूँ,
माँ की वजह से मेरा चमका नशीब है
वो हर घड़ी मेरे दिल के करीब है,
माँ का आदेश पत्थर पर लकीर (patthar par lakeer) है,
उसकी वजह से चमक उठी मेरी तकदीर है,
* * * * *

पत्थर पर लकीर (patthar par lakeer) : माँ का प्रेम

 

पत्थर पर लकीर (patthar par lakeer)
पत्थर पर लकीर (patthar par lakeer)

दीये संग बाती का रिश्ता है जो,
फूलों संग खुशबू का रिश्ता है जो,
कुछ यूं जुड़े हैं माँ से दिल के तार,
जोश जगाए मेहनत कराए,
सबके दिलों में आस जगाए,
प्यारा सा है अपना एक घर -संसार,
माँ बोले तो चलता हूँ वो बोले तो रुकता हूँ,
मै थोड़ा बोलता हूँ ज्यादा सुनता हूँ,
सपने रंग-बिरंगे मन मैं बुनता हूँ,
माँ की वजह से मेरा चमका नशीब है
वो हर घड़ी मेरे दिल के करीब है,
माँ का आदेश पत्थर पर लकीर (patthar par lakeer) है,
उसकी वजह से चमक उठी मेरी तकदीर है,
* * * *
वो मुश्किल के दिनों में याद आए,
जिसे देख मेरा मन मुस्काए,
हर वक्त राहों में खड़ी मिलती है,
मैं चूम लेता हूँ उसका माथा,
उसके चरण छूता हूँ हर प्रात:,
मैं बैठ जाता हूँ माँ के पास,
जब भी फूरसत मिलती है,
माँ रखती है परिवार जोड़कर,
मैं थाम लेता हूँ उसको दौड़कर,
जब भी उसके हाथों से छड़ी गिरती है,
माँ को गहरी नींद में सोता देखकर,
फिर मैं भी सो जाता हूँ,
मै थोड़ा बोलता हूँ ज्यादा सुनता हूँ,
सपने रंग-बिरंगे मन मैं बुनता हूँ,
माँ की वजह से मेरा चमका नशीब है
वो हर घड़ी मेरे दिल के करीब है,
माँ का आदेश पत्थर पर लकीर (patthar par lakeer) है,
उसकी वजह से चमक उठी मेरी तकदीर है,
* * * * *
मेरी खुशियों का राज है माँ,
प्यारे-प्यारे बोले अल्फाज़ है माँ,
उस रब पर आस्था गहरी है,
मेरे जीवन का ज्ञान है माँ,
सबसे प्यारी इन्सान है माँ,
हम सबके जीवन का वो प्रहरी है,
माँ घूमती है जब आंगन में,
चिड़ियां भी चहकने लगती हैं,
खिल उठती हैं कलियां फूलों की,
सितारों की तरह चमकने लगती हैं,
वो दुआओं की लगा देती है जड़ी,
मैं जब भी कदमों में झुकता हूँ,
मै थोड़ा बोलता हूँ ज्यादा सुनता हूँ,
सपने रंग-बिरंगे मन मैं बुनता हूँ,
माँ की वजह से मेरा चमका नशीब है
वो हर घड़ी मेरे दिल के करीब है,
माँ का आदेश पत्थर पर लकीर (patthar par lakeer) है,
उसकी वजह से चमक उठी मेरी तकदीर है,
* * * * *
creater-राम सैणी
must read: रोटी का आदर (roti ka adar ) : स्नेह का प्रसाद
must read:  पीपल की घनी छाँव (ghani chhanv) : मिट्टी की खुशबू

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

2 thoughts on “पत्थर पर लकीर (patthar par lakeer) : माँ का आदेश”

  1. Pingback: समंदर से भी गहरा ( Samandar Se Bhi Gahra)

  2. Pingback: बेटा कहकर पुकारा (beta Kahkar Pukara ): कुदरत का चमत्कार

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top