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नटखट चुटकी (natkhat chutaki )

नटखट चुटकी (natkhat chutaki ) का ग़ुस्सा : सबसे अलग

मेरी नटखट चुटकी (natkhat chutaki ) क्यों बैठी है मुंह फुलाकर,
अपना प्यारा-सा चेहरा एक तरफ घूमाकर,
छोटी-छोटी बात पर जिद्द करना,
हर बार खुद को सही सिद्ध करना,
तुम क्यों रखना चाहती हो घर में,
सबको अपने आगे झूकाकर,
*      *       *      *       *
हर बार जिद्द करना खुद को सही सिद्ध करना,
ये बात मेरी चुटकी ठीक नहीं है,
हर बात में टांग अड़ाना,
घर में सबका मजाक बनाना,
ये बात मेरी चुटकी ठीक नहीं है,
इस भोले-भाले से चेहरे पर,
गुस्से की लकीरों का क्या काम है,
मेरे इस दिल पर मेरी प्यारी चुटकी,
सबसे उपर बस एक तेरा ही नाम है,
मैंने अपने दिल पर मेरी चुटकी,
बस तेरा ही नाम रखा है लिखाकर,
मेरी नटखट चुटकी (natkhat chutaki ) क्यों बैठी है मुंह फुलाकर,
अपना प्यारा-सा चेहरा एक तरफ घूमाकर,
छोटी-छोटी बात पर जिद्द करना,
हर बार खुद को सही सिद्ध करना,
तुम क्यों रखना चाहती हो घर में,
सबको अपने आगे झूकाकर,
*      *       *      *       *
इतनी छोटी उम्र और इतना गुस्सा,
यूं लगता है जैसे फूलों के बगीचे में,
आज उठ रहा हो धूंवा-सा,
मेरी चुटकी इस गुलाबी चेहरे को,
सदा खिल-खिलाकर रहना चाहिए,
पापा जब लौटते हैं घर श्याम को,
उसको मुस्कराते चेहरे से मिलना चाहिए,
आओ अपने पापा के गले से लग जाओ,
जो भी हुआ सब-कुछ भुलाकर,
मेरी नटखट चुटकी (natkhat chutaki ) क्यों बैठी है मुंह फुलाकर,
अपना प्यारा-सा चेहरा एक तरफ घूमाकर,
छोटी-छोटी बात पर जिद्द करना,
हर बार खुद को सही सिद्ध करना,
तुम क्यों रखना चाहती हो घर में,
सबको अपने आगे झूकाकर,
*      *       *      *       *
पापा पहले सून लो मेरी बात,
फिर तुम जाना घर के अंदर,
आज मेरे दिल में उठ रहा है,
गुस्से का लाल समंदर,
पहले तो बड़ी माँ ने मुझे ताना मारा है,
मुझे शैतानों की माँ कहकर पुकारा है,
पापा मैं आज से बड़ी माँ से बात नहीं करूंगी,
हर बात में इन्कार करूंगी,
फिर उसे गलत लगे या सही,
वो जब भी मुझे बुलाएगी,
मैं ना में सर हिलाऊंगी,
फिर उसे गलत लगे या सही,
पापा रुको अभी और सुनाना बाकी है,
ये तो एक छोटी सी झांकी है,
आज घर पर आईं थीं बड़ी मासी,
साथ लेकर आई थी अपने दो नाती,
माँ ने उनको अपनी गोद में उठाया,
फिर मेरे झूले में उनको बिठाया,
वो मेरे खिलोनों से खेले हैं,
ऐसा लग रहा था उनको देखकर,
जैसे सारे एक ही गुरु के चेले हैं,
मेरे खिलोनों को रखा है अपने थैले में छुपाकर,
मेरी नटखट चुटकी (natkhat chutaki ) क्यों बैठी है मुंह फुलाकर,
अपना प्यारा-सा चेहरा एक तरफ घूमाकर,
*      *       *      *       *

नटखट चुटकी (natkhat chutaki ) का ग़ुस्सा : रूठने का नया अंदाज़ ,

 

नटखट चुटकी (natkhat chutaki )
नटखट चुटकी (natkhat chutaki )

 

पापा मुझे ऐसे लग रहा था,
जैसे किसी ने चुबो दिया है,
मेरे बदन में तीखी सुई को,
दिल कर रहा था पुरे घर के सिरहानों की,
मैं निकाल फेंकूं सफेद रुई को,
सारे घर में कपड़े बिखेर दूं,
दीवारों पर लाल रेखाएं उकेर दूं,
सभी फूलों को तोड डालूं एक ही झटके में,
काला रेत भर दूं ठंडे पानी के मटके में,
पापा मेरा गुस्सा शांत नहीं होगा,
जब तक माँ मुझे गोद में ना उठाले आकर,
मेरी नटखट चुटकी (natkhat chutaki ) क्यों बैठी है मुंह फुलाकर,
अपना प्यारा-सा चेहरा एक तरफ घूमाकर,
छोटी-छोटी बात पर जिद्द करना,
हर बार खुद को सही सिद्ध करना,
तुम क्यों रखना चाहती हो घर में,
सबको अपने आगे झूकाकर,
*      *       *      *       *
चलो ठीक है मेरी चुटकी,
आज से कोई नहीं भड़काएगा,
तुम्हारे गुस्से की ज्वाला को,
मैंने बोल दिया है तुम्हारी माँ बृजबाला को,
बड़ी माँ की तरह से मैं माफी मांगता हूँ,
आगे से तुम्हारे साथ प्यार से बोलेगी,
मैंने तुम्हारी माँ को भी डांटा है,
आगे से तुम्हारे खिलोनों को,
किसी और के आगे नहीं डालेगी,
मैंने तुम्हारी माँ कै बोल दिया है,
गुस्से से आँख दिखाकर,
मेरी नटखट चुटकी (natkhat chutaki ) क्यों बैठी है मुंह फुलाकर,
अपना प्यारा-सा चेहरा एक तरफ घूमाकर,
छोटी-छोटी बात पर जिद्द करना,
हर बार खुद को सही सिद्ध करना,
तुम क्यों रखना चाहती हो घर में,
सबको अपने आगे झूकाकर,
*      *       *      *       *
ऐसे नहीं पापा तीन बार उठक-बैठक लगाओ,
घर के आंगन में मेरे सामने,
सबसे पहले माँ आएगी मेरा हाथ थामने,
आगे से वो ऐसा नहीं करेगी,
मुझे बोलेगी दोनों कान पकड़कर,
बड़ी माँ को भी आना होगा,
मुझे अपने कान पकड़कर दिखाना होगा,
मेरी चुटकी बड़ी माँ तो बड़ी होती है,
वो तो मुझको भी सुना देती है,
चलो अब मान भी जाओ,
अपने पापा से अगर करती हो प्यार,
अब सबको माफ करो,
अपने पापा को खुश कर दो,
अपना भोला सा चेहरा दिखाकर,
मेरी नटखट चुटकी (natkhat chutaki ) क्यों बैठी है मुंह फुलाकर,
अपना प्यारा-सा चेहरा एक तरफ घूमाकर,
छोटी-छोटी बात पर जिद्द करना,
हर बार खुद को सही सिद्ध करना,
तुम क्यों रखना चाहती हो घर में,
सबको अपने आगे झूकाकर,
*      *       *      *       *

creater-राम सैनी

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