बड़े चंचल हैं ये नन्हे कदम(nanhe kadam ),
सारे घर में मस्ती करते हैं हरदम,
मेरी बेटी जब भी चलती है नन्हें-नन्हें कदमों से,
उसकी पायल करती है छम-छम,
बेटी नन्हें-नन्हें कदमों से जब से चलने लगी है,
हमारे घर में मुस्कान की किरणें बिखरने लगी हैं,
उसका छोटा सा मुख देखकर ,
आंखों में शरारत उतरने लगीं है,
वो जब चलते-चलते गिर जाती है,
उसको थामने के लिए तैयार रहते हैं हम,
बड़े चंचल हैं ये नन्हे कदम (nanhe kadam ),
सारे घर में मस्ती करते हैं हरदम,
मेरी बेटी जब भी चलती है नन्हें-नन्हें कदमों से,
उसकी पायल करती है छम-छम
* * * * *
उसके नन्हे कदम(nanhe kadam ),
जबसे शरारत करने लगे हैं,
हम अपनी बेटी की पहले से ज्यादा,
हिफाजत करने लगे हैं,
वो पानी में खेलती है,हाथों से पानी उड़ेलती है ,
जहाँ से मना करते हैं उसको वहीं पर जाना है,
मिट्टी से नहाती हैं, मिट्टी में घर बनाती है,
बार-बार नल के नीचे,ठंडे पानी से नहाना है,
सारे घर में करती है शोर-शराबा,
उसे सबका प्यार मिलता है कुछ ज्यादा,
इसलिए थोड़ी बिगड़ी हुई है,
पल में यहाँ पल में वहाँ,
ऐसे लगता जैसे कोई छुई-मुई है,
उसके नन्हें चेहरे पर हंसी ऐसी लगती है,
जैसे गगन में तारों की चमचम है,
बड़े चंचल हैं ये नन्हे कदम(nanhe kadam ),
सारे घर में मस्ती करते हैं हरदम,
मेरी बेटी जब भी चलती है नन्हें-नन्हें कदमों से,
उसकी पायल करती है छम-छम
* * * * *
उसकी पायल का है मीठा-मीठा शोर,
मुख पर गुस्सा है जैसे बादल घनघोर,
काला डोरा बंधा है उसके दोनों हाथों में,
वो कुछ बोलती रहती है अपनी भाषा में,
उससे बतियाने की कोशिश करता हूँ ज्यादा मैं,
नीले-नीले तारें हैं उसकी दोनों आँखों में ,
पहली बार जब बेटी ने पापा बोला था,
सच में कितना खूबसूरत वो वेला था,
दिल में खुशी के बादल उमड रहे थे,
हमारे चारों ओर जैसे ठंडी-ठंडी हवा के
झोंके बिखर रहे थे,
शयाने कह गए हैं बेटी कीमती धन है,
बड़े चंचल हैं ये नन्हे कदम(nanhe kadam ),
सारे घर में मस्ती करते हैं हरदम,
मेरी बेटी जब भी चलती है नन्हें-नन्हें कदमों से,
उसकी पायल करती है छम-छम
* * * * *
मुस्कान बिखेरते नन्हे कदम(nanhe kadam ) : नन्ही परी के चंचल कदम

nanhe kadam
अपनी छोटी सी जुबान को,
बार-बार मुख से बाहर निकालती है,
अपनी आँखों को हर पल टिमटिमाती है,
सुबह उठते ही घर के खुले आंगन में,
वो फूलों के पास पहूँच जाती है,
हमारे आंगन में पेड़ पर पड़े झूलों को देखकर,
वो झूलों के पास पहूँच जाती है,
रंग-बिरंगी तितलियों को पकडना ,
चिड़ियों को इधर-उधर भागते हुए देखना,
मेरी बेटी को अच्छा लगता है,
चलती हुई लगती है छुई-मुई सी गुड़िया,
हंसतीं हुईं लगती है सात सुरों की सरगम,
बड़े चंचल हैं ये नन्हे कदम(nanhe kadam ),
सारे घर में मस्ती करते हैं हरदम,
मेरी बेटी जब भी चलती है नन्हें-नन्हें कदमों से,
उसकी पायल करती है छम-छम
* * * * *
वो रुठ जाने पर निकाल फेंकतीं है,
अपनी पायल के घुंघरू,
फिर हो जाता है उसका असली खेल शुरू,
कभी अपनी माँ के बालों को पकड़ती है,
कभी धरती पर सर रगड़ती है,
मटके के पानी को गिराकर,
हमको अपनी रोनी सूरत दिखाकर,
बड़ी माँ की गोद में चड जाती है,
वो एक आँख से देखतीं रहती है,
गुस्से में कुछ ना कुछ बोलती रहती है,
फिर कभी अपनी माँ के आगे,कभी मेरे आगे
मुंह फुलाकर खड जाती है,
जब हम दोनों कान पकड़कर,
उठक-बैठक लगातें है,
फिर कहीं जाकर वो लेती है दम,
बड़े चंचल हैं ये नन्हे कदम(nanhe kadam ),
सारे घर में मस्ती करते हैं हरदम,
मेरी बेटी जब भी चलती है नन्हें-नन्हें कदमों से,
उसकी पायल करती है छम-छम
* * * * *
creation -राम सैणी
read more sweet poetry
click here –> बेटी का जन्मदिन ( janmdin ) : इंतज़ार का दिन .
click here –> कैसे बाँटोगे बलिदानी माँ ( kaise bantoge balidani maa )




