नंगे पाँव चलता फ़रिश्ता(nange paanv chalta farishata)
- ये रब ने कैसा बनाया रिश्ता है,
हर घड़ी परिवार के लिए पिसता है,
मुझे कांधे पर उठाए रखता है,
खुद धूप में वो नंगे पाँव चलता फ़रिश्ता(nange paanv chalta farishata) है,
इस फ़रिश्ते से कितना गहरा रिश्ता है,
इस फ़रिश्ते का नाम ही पिता है,
* * * * *
मेरे कोमल पाँव को बचाकर रखा,
रास्ते की गर्म धूल से,
मुझे अपनी बाहों मे उठाकर रखा,
मेरे कोमल पाँव कहीं धरती को ना छू ले भूल से,
एक हाथ से मुझको थामकर रखा था,
दुजे हाथ में ठंडा जल था,
पिता कभी अपने हाथों से मुझे जल पिलाएं,
कभी मेरे माथे का पसीना पोंछे,
मैं भूले से भी नहीं भूलता,
वो इतना यादगार पल था,
सीधा-सीधा,नेक दिल,
एकदम साफ दिल का है,
मुझे कांधे पर उठाए रखता है,
खुद धूप में वो नंगे पाँव चलता फ़रिश्ता(nange paanv chalta farishata) है,
इस फ़रिश्ते से कितना गहरा रिश्ता है,
इस फ़रिश्ते का नाम ही पिता है,
* * * * *
पिता मुझसे बातें करता रहा सारे रस्ते,
वो मेरी सूरत देखकर चलता रहा हंसते-हंसते,
खुद से ज्यादा उसे मेरा फिक्र था,
पिता की जुबान पर हर घड़ी मेरा जिक्र था,
मैं पिता को देखकर सचमुच हैरान था,
उसे नंगें पाँव चलते हुए देखकर मै परेशान था,
इतना जोश इतनी हिम्मत,
हर घड़ी दिखाता है
ये रब ने कैसा बनाया रिश्ता है,
हर घड़ी परिवार के लिए पिसता है,
मुझे कांधे पर उठाए रखता है,
खुद धूप में वो नंगे पाँव चलता फ़रिश्ता(nange paanv chalta farishata) है,
इस फ़रिश्ते से कितना गहरा रिश्ता है,
इस फ़रिश्ते का नाम ही पिता है,
* * * * *
मेरा कोमल चेहरा मुरझा ना जाए,
कहीं फुलों के जैसे उसे ये डर था,
मैं पसीने से कहीं भीग ना जाऊं,
बारिश के पानी के जैसे उसे ये डर था,
रास्ते में पेड़ों की घनी छाँव देखकर,
पिता के चेहरे पर एक प्यारी मुस्कान थी,
प्यारे-प्यारे मेरे दो पाँव देखकर,
उसके चेहरे पर एक छोटी सी मुस्कान थी,
उसके जैसा शाय़द ही कोई प्यार करता है,
ये रब ने कैसा बनाया रिश्ता है,
हर घड़ी परिवार के लिए पिसता है,
मुझे कांधे पर उठाए रखता है,
खुद धूप में वो नंगे पाँव चलता फ़रिश्ता(nange paanv chalta farishata) है,
इस फ़रिश्ते से कितना गहरा रिश्ता है,
इस फ़रिश्ते का नाम ही पिता है,
* * * * *
नंगे पाँव चलता फ़रिश्ता(nange paanv chalta farishata) :बिना ताज का राजा

मुझे कुछ पल छाँव में बिठाकर,
पिता के दिल को थोडा चैन था,
वो देखने लगा अपने पाँव उठाकर,
पिता थोडा-थोडा हैरान था,
कभी वो मेरे सर पर हाथ फेरता,
कभी अपने पाँव पर,
मुझे हर मुश्किल से बचाकर रखेगा,
पिता हर हाल में उम्रभर,
पिता ने एक बार फिर देखा,
मुझे नजर उठाकर,
वो फिर से चल पडा उसी रास्ते पर,
मुझे अपने कांधे पर बिठाकर,
हमारी ओर देखता है मुस्कराकर,
पिता जब भी घर से निकलता है,
ये रब ने कैसा बनाया रिश्ता है,
हर घड़ी परिवार के लिए पिसता है,
मुझे कांधे पर उठाए रखता है,
खुद धूप में वो नंगे पाँव चलता फ़रिश्ता(nange paanv chalta farishata) है,
इस फ़रिश्ते से कितना गहरा रिश्ता है,
इस फ़रिश्ते का नाम ही पिता है,
* * * *
मेरी सच्ची दौलत सच्ची शौहरत,
हमेशा मेरे साथ रहे पिता के रूप में,
साथ रहे पल-पल का,
साथ रहे मेरे सफलता मेरे पिता के रूप में,
मुझे कांटों का अब डर नहीं,
रक्षक बनकर चल रहा है मेरे साथ पिता,
ना तेज हवाओं का,ना काली रातों का डर है,
शिक्षक बनकर चल रहा है मेरे साथ पिता,
एक जादुई शक्ति है पिता के हाथों में,
इंसान को परखने की शक्ति है पिता की आँखों में,
उसका चेहरा खिलता है,
बरसते बादलों को देखकर,
उसका दिल पिंगलता है,
बेबस को तरसता देखकर,
वो पुण्य कर्म करता रहता है,
हर घड़ी पाप से बचता रहता है ,
ये रब ने कैसा बनाया रिश्ता है,
हर घड़ी परिवार के लिए पिसता है,
मुझे कांधे पर उठाए रखता है,
खुद धूप में वो नंगे पाँव चलता फ़रिश्ता(nange paanv chalta farishata) है,
इस फ़रिश्ते से कितना गहरा रिश्ता है,
इस फ़रिश्ते का नाम ही पिता है,
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Creater – राम सैणी
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