चिड़ियां मिट्टी में नहाने लगती है,
मंदिर से घंटीयो की मधुर आवाज आने लगती है
जब मेरी माँ के प्यारे चेहरे पर ,
मुस्कान की किरणें (muskan ki kiranen ) छाने लगती हैं ,
* * * * * *
यूं लगता है जैसे फूलों की वर्षा हो रही है,
इस नीले आकाश से,
हमारा घर अंदर-बाहर में चमकने लगता है,
माँ के चेहरे के दिव्य प्रकाश से,
चिड़ियां चीं-चीं करती हुई,
एक-दूसरे से लडती हुई,
आंगन की मिट्टी में नहा रही थी,
हमारे घर के हर कोने से,
प्यारी-प्यारी सुगंध आ रही थी,
माँ जहाँ भी देखती थी नजर उठाकर,
सारे घर में जैसे सूरज की लाली छा रही थी ,
माँ के चेहरे पर खुशियों की,
रंग-बिरंगी लकीरें देखकर,
किस्मत भी अपना रंग दिखाने लगती है,
चिड़ियां मिट्टी में नहाने लगती है,
मंदिर से घंटियो की मधुर आवाज आने लगती है
जब मेरी माँ के प्यारे चेहरे पर ,
मुस्कान की किरणें (muskan ki kiranen ) छाने लगती हैं ,
* * * * * *
मेरा कंई दिनों से कर रहा था मन,
मैंने हिम्मत करके पूछ लिया एक दिन,
रास्ते से गुजरते एक बाबा से,
क्यों सूरज का उजाला भी फीका लगता है,
मेरी माँ के चेहरे की आभा से,
वो बोला तूं नशीब वाला है,
जल्दी ही तेरे नशीब का खुलने वाला ताला है,
उस बेटे का आने वाला कल रगींन है,
जिस बेटे को माँ के चेहरे में,
उस ईश्वर की सूरत नज़र आने लगती है,
चिड़ियां मिट्टी में नहाने लगती है,
मंदिर से घंटियों की मधुर आवाज आने लगती है
जब मेरी माँ के प्यारे चेहरे पर ,
मुस्कान की किरणें (muskan ki kiranen ) छाने लगती हैं ,
* * * * * *
बारिश की बूंदें छम-छम करती हैं,
मीठा-मीठा शोर एकदम करती हैं,
माँ के चेहरे पर देखकर मुस्कान की किरणें,
मन ऐसे उछलता है खुशी के मारे,
जैसे देखकर उछलता है वन में भागती हिरणें,
हमारे घर की मुंडेर पर,भागता है इधर-उधर,
एक काला कौवा कांव-कांव करता,
माँ जब भी निकलती है घर से बाहर धूप में,
बादलों का एक छोटा सा टुकड़ा,
माँ के सर पर छाँव है करता,
जिस ओर से मेरी माँ गुजरती है,
उसी ओर से ठंडी-ठंडी हवा आने लगती है,
चिड़ियां मिट्टी में नहाने लगती है,
मंदिर से घंटियो की मधुर आवाज आने लगती है
जब मेरी माँ के प्यारे चेहरे पर ,
मुस्कान की किरणें (muskan ki kiranen ) छाने लगती हैं ,
* * * * * *
मुस्कान की किरणें (muskan ki kiranen ) : खुशियों की सुनहरी परछाई

मानों सूरज भी कुछ समय के लिए ढल जाता है,
माँ छूती है जब घर की चौखट को,
वो फिर से एक दम निकल आता है,
कोयल बार-बार आती है आंगन में,
अपनी मीठी आवाज सुनाने को,
मेरी माँ के चेहरे का दिव्य प्रकाश,
हर किसी को मजबुर कर देता ,
हमारे आंगन में आने को,
काली कोयल माँ के चारों ओर घूमती है,
वो जब भी आंगन से जाने लगती है,
चिड़ियां मिट्टी में नहाने लगती है,
मंदिर से घंटीयो की मधुर आवाज आने लगती है
जब मेरी माँ के प्यारे चेहरे पर ,
मुस्कान की किरणें (muskan ki kiranen ) छाने लगती हैं ,
* * * * * *
माँ का आशीर्वाद लेकर सर पर,
मैं धन-दौलत कमाना चाहता हूँ,
जितना मुस्कराती है मेरी माँ आजकल,
मैं ये मुस्कराहट और बढ़ाना चाहता हूँ,,
जोश आ जाता है मेरे बदन में,
दिन में तारे खिलने लगते हैं नीले गगन में,
उसके चेहरे पर मुस्कान की किरणें देखकर,
मेरा सीना चौड़ा हो जाता है,
मन में तनाव थोड़ा हो जाता है,
उसके चेहरे पर मुस्कान की किरणें देखकर,
हम-सब भी खड़े हो जाते हैं,
हाथ हवा में लहराने के लिए,
माँ जब खुश होकर अपने हाथ,
हवा में लहराने लगती है,
चिड़ियां मिट्टी में नहाने लगती है,
मंदिर से घंटीयो की मधुर आवाज आने लगती है
जब मेरी माँ के प्यारे चेहरे पर ,
मुस्कान की किरणें (muskan ki kiranen ) छाने लगती हैं ,
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मैं उसकी हर दुआ हर प्रार्थना में शामिल रहता हूँ,
मैं सबको आजकल कहता हूँ,
माँ तूं धीरे मुस्करा या खुल कर,
बस हर घड़ी मुस्कराते हुए रहना,
तूं खिलते हुए फूलों के जैसे,
हर घड़ी घर में खिलखिलाते हुए रहना,
जब माँ तूं ख़ुश होती है तो,
तेरे चेहरे पर सूरज की लाली,
अपना रंग दिखाने लगती है,
चिड़ियां मिट्टी में नहाने लगती है,
मंदिर से घंटीयो की मधुर आवाज आने लगती है
जब मेरी माँ के प्यारे चेहरे पर ,
मुस्कान की किरणें (muskan ki kiranen ) छाने लगती हैं ,
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creater-राम सैणी
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