( minni bank )

बड़ी माँ का मिनी बैंक ( minni bank ) : खनकती यादें

अपने दुपट्टे के एक कोने में,
खनकते सिक्के बांधकर रखती है,
एक छोटा-सा मिनी बैंक ( minni bank ),
मेरी बड़ी माँ आज भी रखती है,
अपने दुपट्टे को मेरी बड़ी माँ,
अपने सर के नीचे दबाकर सोती है,
वो बार-बार करवटें बदलती है,
बड़ी माँ जब भी गहरी नींद में होती है,
वो अपने दुपट्टे को हर वक्त,
अपने हाथों में थामकर रखती है,
अपने दुपट्टे के एक कोने में,
खनकते सिक्के बांधकर रखती है,
एक छोटा-सा मिनी बैंक ( minni bank ),
मेरी बड़ी माँ भी रखती है,
* * * *
अपने दुपट्टे को धोने से पहले,
बड़ी माँ उसे चार बार निहारती है,
खनकते सिक्कों को निकालकर,
फिर उसे धूप में डालती है,
बड़ी माँ देती है मुझे एक सिक्का हर रोज,
बड़ी माँ के रहते हमारी है मौज ही मौज,
बड़ी माँ के सुर में सुर मिलाकर रखना पड़ता है,
उसे अपना गुरु बनाकर रखना पड़ता है,
इस उम्र में भी उसकी नज़र बड़ी तेज है,
ज्यादा पैसे खर्चने से वो करती परहेज़ है,
एक-एक पैसे का हिसाब मेरी बड़ी माँ,
आज भी हर रोज लिखती हैं,
अपने दुपट्टे के एक कोने में,
खनकते सिक्के बांधकर रखती है,
एक छोटा-सा मिनी बैंक ( minni bank ),
मेरी बड़ी माँ भी रखती है,
* * * *
खनकते सिक्कों को बड़ी माँ,
घर में छुपाकर रखती है,
जहां हाथ ना पंहुचे हम सबका,
इतना ऊपर उठाकर रखती है,
बड़ी माँ नहीं चाहती है की,
कोई उनके सिक्कों को हाथ लगाए,
खनकते सिक्कों को देखकर,
बड़ी माँ की आँखों में,
एक अलग ही चमक आ जाए,
बड़ी माँ सिक्कों वाला दुपट्टा हाथ में लेकर,
गांव में बड़ी शान से चलती है,
अपने दुपट्टे के एक कोने में,
खनकते सिक्के बांधकर रखती है,
एक छोटा-सा मिनी बैंक ( minni bank ),
मेरी बड़ी माँ भी रखती है,
* * * *
वो दुपट्टा जैसे बड़ी माँ की जान हो,
वो दुपट्टा जैसे बड़ी माँ की शान है,
एक रात बड़ी माँ के सिक्के,
उसके दुपट्टे से निकलकर,
घर के किसी कोने में खो ग‌ए,
अपने दुपट्टे को खाली देखकर,
बड़ी माँ के नयन पहले से मोटे-मोटे हो ग‌ए,
उस रात बड़ी माँ की आँखों में नींद बाकी थी,
वो बार-बार मुंह खोलकर ले रही उबासी थी,
खनकते सिक्कों को देखकर,
बड़ी माँ की आँख खुलती थी,
अपने दुपट्टे के एक कोने में,
खनकते सिक्के बांधकर रखती है,
एक छोटा-सा मिनी बैंक ( minni bank ),
मेरी बड़ी माँ भी रखती है,
* * * *

बड़ी माँ का मिनी बैंक ( minni bank ) : दुपट्टे में बँधा विश्वास

 

 

( minni bank )
( minni bank )

बड़ी माँ की तेज निगाहें है,
उसकी लंबी-लंबी बांहें हैं,
अपने सिक्कों को खोज निकाला,
बड़ी माँ ने एक ही पल में,
फिर झट से खुद को संभाला,
बड़ी माँ ने एक ही पल में,
अपने सिक्कों को बड़ी माँ बड़े ध्यान से रखती है,
अपने दुपट्टे के एक कोने में,
खनकते सिक्के बांधकर रखती है,
एक छोटा-सा मिनी बैंक ( minni bank ),
मेरी बड़ी माँ आज भी रखती है,
* * * *
बड़ी माँ को मुझसे कुछ ज्यादा ही लगाव है,
हर वक्त मुझे देती रहती है न‌ए-न‌ए सुझाव है ,
उसके तेज़ दिमाग का कोई सानी नहीं है,
उसके जैसा पुरे गांव में कोई दानी नहीं है,
जुबां की पक्की,नीयत की अच्छी,
हर सुबह शुक्रीया करती है,
आसमान की ओर देखकर,
हर सुबह शुक्रीया करती है,
ईश्वर के एहसान देखकर,
बातें बनाने में कुछ ज्यादा ही तेज है,
वो अपने सामने रखती है,
एक लकड़ी की मेज है,
उस मेज पर रखी अध्यात्म की किताबें,
बड़ी माँ हर सुबह पडती है,
अपने दुपट्टे के एक कोने में,
खनकते सिक्के बांधकर रखती है,
एक छोटा-सा मिनी बैंक ( minni bank ),
मेरी बड़ी माँ भी रखती है,
* * *
रब पर भरोसा हद से ज्यादा है
बातों में निपुण हैं,सर्वगुण सम्पन्न है,
पुरा करें अपना हर वादा है ,
एक सिक्का देकर एक कहानी,
मुझे हर रोज सुनाती है,
मात-पिता की सेवा को ही,
रब की सच्ची बंदगी बताती है,
कागज के कुछ नोट बड़ी माँ,
आटे वाले थैले में छुपाकर रखती है,
वो थैला ना हो इधर-उधर,
ये हम सबको बताकर रखती है,
हर सुबह हमारे सर पर,
बड़ी माँ अपना दुआओं वाला हाथ भी रखती है,
अपने दुपट्टे के एक कोने में,
खनकते सिक्के बांधकर रखती है,
एक छोटा-सा मिनी बैंक ( minni bank ),
मेरी बड़ी माँ आज भी रखती है,
* * * *
creation -राम सैणी
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