वो माँ का सम्मान करती है,
उसका सम्मान करना मेरी जिम्मेदारी है,
वो मेरा आधा अंग (Mera aadha ang ) है ,
जीवन जीना उसके संग है,
जिंदगानी कहूं या अर्धांगिनी,
हमारे घर पर अब उसकी पहरेदारी हे,
* * * * *
मैं सौंपकर उसके हाथों में,
डोर अपने घर-परिवार की,
अब चैन की नींद सोता हूँ,
अब कोई चिंता-परेशानी नहीं,
चेहरे पर डर कोई निशानी नहीं,
वो है ना खुद संभाल लेगी,
मैं चाहे कहीं भी होता हूँ,
जब से पड़े घर में उसके कदम,
हम आसमान को छू रहें हैं हरदम,
मुझे लगता जैसे ईश्वर ने,
मेरे लिए ही आसमान से उतारी है,
वो माँ का सम्मान करती है,
उसका सम्मान करना मेरी जिम्मेदारी है,
वो मेरा आधा अंग (Mera aadha ang ) है ,
जिंदगानी कहूं या अर्धांगिनी,
हमारे घर पर अब उसकी पहरेदारी हे,
* * * * *
जब से जुड़ी है मेरी किस्मत,
उसकी किस्मत के साथ,
इस नीले आसमान में उड़ने लगे हैं,
हम फैलाकर अपने दोनों हाथ,
जिंदगी में अब हमारे सुख ही सुख है,
रंग साफ,दो छोटी-छोटी आँखे,
चाँद-सा चमकता मुख है,
माँ को मानती है भगवान,
छोटे हो या बड़े सबका करती है सम्मान,
सच में वो बहुत संस्कारी है,
वो माँ का सम्मान करती है,
उसका सम्मान करना मेरी जिम्मेदारी है,
वो मेरा आधा अंग (Mera aadha ang ) है ,
जिंदगानी कहूं या अर्धांगिनी,
हमारे घर पर अब उसकी पहरेदारी हे,
* * * *
हमारे घर को महका दिया है,
एक मंदिर के जैसे बना दिया है,
जिम्मेदारी क्या चीज़ होती है,
सचमुच निभाकर दिखा दिया है,
वो थोड़ी सी तारीफ से फूल जाती है,
छोटे-मोटे आपसी गिले-शिकवे,
वो श्याम तक भूल जाती है
ये ही अदा उसको सबसे खास बनाती है,
हंसमुख रहना साफ-साफ कहना,
सच बोलकर सदा सुखी रहना,
ये ही सोच उसको सबसे खास बनाती है,
उसके शुभ कदम है हाथ चमत्कारी है,
वो माँ का सम्मान करती है,
उसका सम्मान करना मेरी जिम्मेदारी है,
वो मेरा आधा अंग (Mera aadha ang ) है ,
जिंदगानी कहूं या अर्धांगिनी,
हमारे घर पर अब उसकी पहरेदारी हे,
* * * * *
मेरा आधा अंग (Mera aadha ang ) : मेरी शक्ति

घर में अकेली है माँ ही उसकी सहेली है,
काम के साथ-साथ घर में करती है मस्ती,
जब वो खिलखिला कर है हंसतीं,
ऐसे लगता है जैसे घर में सितारे चमक रहे हों,
वो एक गुड़िया के जैसे लगती है,
सुबह चौथे पहर में बिस्तर से उठती है,
जब माँ को करती है नमस्कार,
ऐसे लगता है जैसे घर में,
रंग-बिरंगे फूल महक रहे हों,
सबका दिल जीत लेती है,
जब वो बातें करती प्यारी-प्यारी है,
वो माँ का सम्मान करती है,
उसका सम्मान करना मेरी जिम्मेदारी है,
वो मेरा आधा अंग (Mera aadha ang ) है ,
जिंदगानी कहूं या अर्धांगिनी,
हमारे घर पर अब उसकी पहरेदारी हे,
* * * * *
छोटा-सा हमारा गाँव है चर्चा ये सरेआम है,
घर में हमारे बहू के रूप में लक्ष्मी आईं हैं,
कद छोटा है जुबां मीठे जल का लौटा है,
लेकिन विचार ऊँचे रखती है,
स्वभाव मिलनसार है खानदानी संस्कार हैं,
बच्चों संग रखती है सदा दोस्ताना व्यवहार है,
छोटी-सी जिंदगानी है उस रब की मेहरबानी है,
ऐसे ही विचार वो मन में रखती है,
सदा बड़बोलेपन से दूर रहें,
हंसमुख स्वभाव के कारण मशहूर रहे,
हर काम में निपुण है सर्व गुण संपन्न है,
वो ताकत बनकर रहती हमारी है,
वो माँ का सम्मान करती है,
उसका सम्मान करना मेरी जिम्मेदारी है,
वो मेरा आधा अंग (Mera aadha ang ) है ,
जिंदगानी कहूं या अर्धांगिनी,
हमारे घर पर अब उसकी पहरेदारी हे,
* * * * *
वो फैंसले लेती है अपनी लंबाई के बराबर,
मेहमानों को देखकर खिल जाए,
खुश रहे जितना भी मिल जाए,
उस फैसले के सदा खिलाफ रहे ,
जो ग़लत हो सरासर,
मेरे विचारों से उसके विचार,
मेरे संस्कारों से उसके संस्कार,
एकदम मेल खाते हैं,
हमारे घर में हमारे जीवन में,
उसकी बराबर की हिस्सेदारी है,
वो माँ का सम्मान करती है,
उसका सम्मान करना मेरी जिम्मेदारी है,
वो मेरा आधा अंग (Mera aadha ang ) है ,
जिंदगानी कहूं या अर्धांगिनी,
हमारे घर पर अब उसकी पहरेदारी हे,
* * * * *
creater-राम सैणी
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