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माँ पहले आप (maa pahle aap )

माँ पहले आप (maa pahle aap ) : एक बेटे की श्रद्धा

मानों मेरी हर मन्नत पूरी हो गई,
मेरे मन पर छप गई है,
उसकी मीठी बोली की छाप,
मेरे मन को मोह लेता है मेरा बेटा,
जब खाने की थाली लेकर कहता है,
खा लीजिए माँ पहले आप (maa pahle aap ),
* * * *
मैं गद-गद हो जाती हूँ,
उसके हाथों में देखकर खाने की थाली,
शायद मेरे जैसी कोई बिरला ही होगी,
इस संसार में कोई माँ नशीबोंवाली,
उसके प्यार का उसके सत्कार का,
कोई भी सानी नहीं है,
मैं क्यों ना करूं तारीफ अपने लाल की,
वो गम्भीर स्वभाव का है बचपन से,
कभी करता कोई नादानी नहीं है,
मेरा मन खुशी के मारे उछल रहा है ,
मेरा जीवन हंसते-खेलते निकल रहा है,
मेरे मन को मोह लेता है मेरा बेटा,
जब हर सुबह-सुबह मेरी आँख खुलते ही,
हाथ में चाय की प्याली लेकर कहता है,
चाय पी लीजिए माँ पहले आप (maa pahle aap ),
* * * *
वो डोर है चमकते रेशम की,
मुख पर सूरज की लाली है,
मैंने सींचा है उसको अपने लहू से,
वो इसी घने पेड़ की डाली है,
भुल से भी अगर हो जाए उस से गलती,
मेरे मन को मोह लेता है मेरा बेटा,
जब वो हाथ जोड़कर विनती करता है ,
हे ईश्वर कर देना तूं मुझको माफ़,
मानों मेरी हर मन्नत पूरी हो गई,
मेरे मन पर छप गई है,
उसकी मीठी बोली की छाप,
मेरे मन को मोह लेता है मेरा बेटा,
जब खाने की थाली लेकर कहता है,
खा लीजिए माँ पहले आप (maa pahle aap ),
* * * *

माँ पहले आप (maa pahle aap ) :बेटे का पहला फ़र्ज़
माँ पहले आप (maa pahle aap )
माँ पहले आप (maa pahle aap )

मैंने की हैं प्रार्थनाएं, मांगी है मन्नतें,
शायद वो सब ईश्वर ने कबूल कर ली हैं,
हर मंदिर की चौखट पर रगड़ा है माथा,
इसलिए सब मन्नतें कबूल कर ली,
मेरी प्रार्थनाओं में रंग भर दिया है,
मेरी झोली में डाला है फूल गुलाब का,
हर सुबह मैं पड़ती थी,
एक -एक अक्षर एक -एक पन्ना,
रामायण हो या गीता हर धार्मिक किताब का,
जितना मांगा था ईश्वर से,
उससे ज्यादा ही मिला है,
अब ईश्वर से ना कोई और गिला है,
मेरे मन को मोह लेता है मेरा बेटा,
जब वो हाथ में पैसा लेकर कहता है,
माँ इसे अपने माथे से लगा लीजिए पहले आप,
मानों मेरी हर मन्नत पूरी हो गई,
मेरे मन पर छप गई है,
उसकी मीठी बोली की छाप,
मेरे मन को मोह लेता है मेरा बेटा,
जब खाने की थाली लेकर कहता है,
खा लीजिए माँ पहले आप (maa pahle aap ),
* * * *
वो मुझको मानता मुझको पूजता है,
मेरे लिए इतना ही काफी है,
मेरे कदमों के नीचे हाथ रखता है,
सबसे उपर मेरी बात रखता है,
मेरे लिए इतना ही काफी है,
ये सब उस ईश्वर की कृपा है,
उसका ही है प्रताप,
मानों मेरी हर मन्नत पूरी हो गई,
मेरे मन पर छप गई है,
उसकी मीठी बोली की छाप,
मेरे मन को मोह लेता है मेरा बेटा,
जब खाने की थाली लेकर कहता है,
खा लीजिए माँ पहले आप (maa pahle aap ),
* * * *
एक चाँद अकेला काफी है,
अपनी रौशनी फ़ैलाने के लिए,
उसका प्यार से बोलना ही काफी है,
चेहरे पर एक प्यारी मुस्कान सजाने के लिए,
वो हमारे कुल का है दीपक,
मेरे होंठों की मुस्कान है वो,
मेरे हाथों से लेकर खुद संभाले,
हमारे प्यारे घर की कमान है वो,
दौलत-शोहरत चूमेगी उसके कदम,
बुलंदियों पर सितारा रहेगा हर दम,
मेरे मन को मोह लेता है मेरा बेटा,
जब कहता है वो लोग मेरे लिए,
शुन्य के बराबर रहेंगे सदा
जो भी बोलते हैं मेरी माँ के खिलाफ,
मानों मेरी हर मन्नत पूरी हो गई,
मेरे मन पर छप गई है,
उसकी मीठी बोली की छाप,
मेरे मन को मोह लेता है मेरा बेटा,
जब खाने की थाली लेकर कहता है,
खा लीजिए माँ पहले आप (maa pahle aap ),
* * * *
वो मिट्टी में हाथ डाल कर सोना निकालेगा,
हर दिन होगी कामयाबी उसके साथ,
वो जहाँ भी हाथ डालेगा,
उसके साथ रहेगी शक्ति मेरी प्रार्थनाओं की,
जो हर पल कद्र करता है मेरी भावनाओं की,
वो शहद बिखेरे चारों ओर,
अपनी प्यारी जुबान से,
मुझे संभालकर रखता है काँच के जैसे,
सच कहती हूँ ईमान से,
भोला-भाला है घर का उजाला है,
मन का एक दम शीशे के जैसे है साफ,
मानों मेरी हर मन्नत पूरी हो गई,
मेरे मन पर छप गई है,
उसकी मीठी बोली की छाप,
मेरे मन को मोह लेता है मेरा बेटा,
जब खाने की थाली लेकर कहता है,
खा लीजिए माँ पहले आप (maa pahle aap ),
* * * *
creater-राम सैणी
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