उस रब को शुक्रिया करने का,
जब भी मेरा मन करता है,
मैं अपनी माँ के माथे को चूम लेता हूँ,
उस रब के सामने झूकने का,
जब भी मेरा मन करता है, मैं अपनी माँ के चरण (maa ke charan ) छू लेता हूँ,
* * * * *
मैं साफ करता हूँ मंदिर की सीढ़ियों को,
मैं तीर्थ धाम भी जाता रहता हूँ,
मन की शांति के लिए हर दिन,
घर की छत पर चिड़ियों को,
दाना-पानी भी डालता रहता हूँ,
वो रंग-बिरंगे फूलों को देखकर,
जब मन-ही-मन मुस्कराती है,
मेरे आत्मा को बल मिलता है,
ऐसा मैं मानता हूँ,
हमारी वजह से माँ खुशियों में चूर रहती है तो,
हम-सब को तीर्थ धाम के बराबर फल मिलता है,
जहाँ तक मैं जानता हूँ,
माँ के आगे -पीछे घूमना,
उसे लग जाए कहीं तेज धूप ना,
माँ के लिए ये सब करना,
मेरे मन को सकूं देता है,
उस रब को शुक्रिया करने का,
जब भी मेरा मन करता है,
मैं अपनी माँ के माथे को चूम लेता हूँ,
उस रब के सामने झूकने का,
जब भी मेरा मन करता है, मैं अपनी माँ के चरण (maa ke charan ) छू लेता हूँ,
* * * * *
उस रब ने दिया है एक तोहफा,
हमको दिया है माँ की सेवा करने का मौका,
माँ को खुश रखने का शायद ये मेरा इम्तिहान है,
शायद औरों के लिए ये कठिन काम है,
मेरे लिए बिल्कुल आसान है,
माँ का नाम जुबां पर आ जाता है,
जब भी उस रब का नाम लेता हूँ,
उस रब को शुक्रिया करने का,
जब भी मेरा मन करता है,
मैं अपनी माँ के माथे को चूम लेता हूँ,
उस रब के सामने झूकने का,
जब भी मेरा मन करता है, मैं अपनी माँ के चरण (maa ke charan ) छू लेता हूँ,
* * * * *
जब भी देखता हूँ आसमान के चमकते सितारे,
वो सब फीके-फीके लगते हैं
मेरी माँ की मुस्कान के आगे सारे
लोग जाते हैं सैर-सपाटे के लिए,
खुश होते हैं गिरती हुई बर्फ का नजारा देखकर,
मैं खुश रहता हूँ अपनी भोली माँ का,
चेहरा प्यारा देखकर,
कुछ लोग मन बहलाते हैं,
कल-कल करते बहते पानी के झरनें को देखकर,
लेकिन मेरा मन बहलता है,
माँ के पावन चरणों में बैठकर,
उसकी सूरत देखें बिना मन उदास -सा रहता है,
पता नहीं ऐसा क्यों होता है,
उस रब को शुक्रिया करने का,
जब भी मेरा मन करता है,
मैं अपनी माँ के माथे को चूम लेता हूँ,
उस रब के सामने झूकने का,
जब भी मेरा मन करता है, मैं अपनी माँ के चरण (maa ke charan ) छू लेता हूँ,
* * * * *
मेरे जीवन में खुशियों के फंव्वारे फूट पड़ते हैं,
वो जब करती है बंद आँखों से प्रार्थनाएं,
वो एक पल में टाल देती है,
मेरे जीवन में आने वाली आपदाएं,
मंदिर की परिक्रमा करने का,
जब भी मेरा मन करता है,
मैं अपनी माँ के चारों ओर घूम लेता हूँ,
उस रब को शुक्रिया करने का,
जब भी मेरा मन करता है,
मैं अपनी माँ के माथे को चूम लेता हूँ,
उस रब के सामने झूकने का,
जब भी मेरा मन करता है,
मैं अपनी माँ के चरण (maa ke charan ) छू लेता हूँ,
* * * * *
उस रब से रिश्ता है दिल का,
जिस ने ये ममता का समंदर बनाया है,
रब जाने किस मिट्टी से बनी है,
भुले से भी जिसके मुख पर,
ना शब्द नहीं आया है,
मैं दुगनी कीमत से लेकर आऊं,
खुशियां अगर मिल जाएं बाजार से,
दुनिया में कोई भी कीमती चीज नहीं है,
जो कीमती हो माँ के निश्चल प्यार से,
वो दरिया है मीठे पानी का,
जब जी चाहे उस मीठे पानी को,
मैं जी भरकर पी लेता हूँ,
उस रब को शुक्रिया करने का,
जब भी मेरा मन करता है,
मैं अपनी माँ के माथे को चूम लेता हूँ,
उस रब के सामने झूकने का,
जब भी मेरा मन करता है,
मैं अपनी माँ के चरण (maa ke charan ) छू लेता हूँ,
* * * * *
वो सुगंधित खिलता हुआ फूल है,
जो सुगंध बिखेरे चारों ओर,
वो अपनी जान से भी ज्यादा रखती है,
संभालकर रिश्तों की डोर,
वो हर पल जिए हंस-हंसकर,
सांसें चले उसकी जब तक,
बस इतनी सी मेंरी है ख्वाहिश,
इस पेड़ की छाँव घनी है वो बातों की धनी है,
जिस माँ की मैं हूँ पैदाइश,
खुशी से झुमने का जब भी मेरा मन करता है,
मै माँ के चेहरे पर खुशी की लकीरें देखकर,
मन ही मन झूम लेता हूँ,
उस रब को शुक्रिया करने का,
जब भी मेरा मन करता है,
मैं अपनी माँ के माथे को चूम लेता हूँ,
उस रब के सामने झूकने का,
जब भी मेरा मन करता है,
मैं अपनी माँ के चरण (maa ke charan ) छू लेता हूँ,
* * * * *
creater –
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