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जीने की कला (jeene ki kla)

हंसते हुए जीने की कला (jeene ki kla) : जीत की राह

हंसते हुए जीने की कला (jeene ki kla),
हंसकर स्वीकारा जितना भी मिला,
ये उपहार मैंने माँ की कोख से पाया है,
मैं उस प्यारी माँ का जाया हूँ,
जिस माँ ने मुझको हर पल हंसना सिखाया है,
* * * * * *
हम महकते फुलों में रहने वाले हैं,
पतझड़ भी सहने वाले हैं,
सदा रहते हैं हमारे बुलंद होंसले,
इतनी जल्दी नहीं डगमगाने वाले हैं,
मखमल पर चलने के शौंक नहीं पाले हैं,
हमारे पैर हैं पत्थर के जैसे,
हम नंगें पैर भी चलने वाले हैं,
अपनी मस्त चाल में चलते रहेंगे,
चाहे पैरों में कितने भी छालें हैं,
दो रोटी ज्यादा मिल जाए तो उसका शुक्रिया,
दो कम खाकर भी बोलें उसका शुक्रिया,
हर पल उस रब का शुक्रिया जुबान पर आया है,
हंसते हुए जीने की कला (jeene ki kla),
हंसकर स्वीकारा जितना भी मिला,
ये उपहार मैंने माँ की कोख से पाया है,
मैं उस प्यारी माँ का जाया हूँ,
जिस माँ ने मुझको हर पल हंसना सिखाया है,
* * * * * *
कभी खोलते नहीं शिकायतों का पिटारा,
हम झूककर प्रणाम करते हैं,
उस ईश्वर से सदा डरते हैं,
पैर मिट्टी से जुड़े रहते हैं,
चाहे आसमान में चमकता हो सितारा,
छोटे-बडे का लिहाज है,
नापतोल कर बोलते अल्फाज़ हैं,
अपना हो चाहे कोई पराया,
सबको हंसकर गले लगाया है,
हंसते हुए जीने की कला (jeene ki kla),
हंसकर स्वीकारा जितना भी मिला,
ये उपहार मैंने माँ की कोख से पाया है,
मैं उस प्यारी माँ का जाया हूँ,
जिस माँ ने मुझको हर पल हंसना सिखाया है,
* * * * * *

हंसते हुए जीने की कला (jeene ki kla) : हौंसले की मिशाल

 

जीने की कला (jeene ki kla)
जीने की कला (jeene ki kla)

हम सबकी भलाई की मन्नतें मांगें,
दिल में भैर नहीं हम पालते हैं,
माँ है हमारी कीमती दौलत,
हम उसका कहा नहीं टालते हैं,
माँ ने भैर करना नहीं सीखाया,
हम प्यार बांटने वाले हैं,
बुरे वक्त में जिनका साथ मिला है,
हम उन-सबका उपकार मानने वाले हैं,
मेरे चेहरे का रंग लाल है,
ये मेरी माँ की मन्नतों का कमाल है,
हमारे चेहरे पर खुशी रहती है हरदम,
जब से उस माँ की कोख से जन्म पाया है,
हंसते हुए जीने की कला (jeene ki kla),
हंसकर स्वीकारा जितना भी मिला,
ये उपहार मैंने माँ की कोख से पाया है,
मैं उस प्यारी माँ का जाया हूँ,
जिस माँ ने मुझको हर पल हंसना सिखाया है,
* * * * * *
खाते हैं अपने नसीब का,
हक नहीं मारते किसी गरीब का,
माँ ने कूट-कूटकर ये मन में डाला है,
होश-चैन सब छिन जाएगा,
कभी ना कभी वो दिन आएगा,
जिस ने लूट-लूटकर वक्त के मारों का,
अपना अंदर-बाहर भर डाला है,
माँ है जान माँ है मुस्कान,
सारे जहां का प्यार माँ के आंचल में समाया है,
हंसते हुए जीने की कला (jeene ki kla),
हंसकर स्वीकारा जितना भी मिला,
ये उपहार मैंने माँ की कोख से पाया है,
मैं उस प्यारी माँ का जाया हूँ,
जिस माँ ने मुझको हर पल हंसना सिखाया है,
* * * * * *
ख्वाब हैं आसमान से ऊँचें,
एक प्यारी डोर मुझे अपनी ओर है खींचे,
ख्वाब पूरे एक दिन हो जाएंगे,
माँ के मुख से निकले हैं जो अल्फाज़,
वो एक दिन पूरे हो जाएंगे,
जीवन में भी रंग होते हैं,
इंद्रधनुष के रंगों की तरह,
माँ से जुड़ा हूँ कुछ इस तरह,
रेशम की डोर से जुड़ी पतंग की तरह,
मेरे जीवन में दुआओं की बारिश होने लगती है ,
जब भी माँ ने हाथ हवा में लहराया है,
हंसते हुए जीने की कला (jeene ki kla),
हंसकर स्वीकारा जितना भी मिला,
ये उपहार मैंने माँ की कोख से पाया है,
मैं उस प्यारी माँ का जाया हूँ,
जिस माँ ने मुझको हर पल हंसना सिखाया है,
* * * * * *
अपने -पराए का भेद नहीं,
हर दिल से हमारा नाता है,
कुछ और नहीं चाहे हमें आता हो,
पर प्यार निभाना आता है,
मैं जागता हूँ रात-रात भर,
माँ का नाम जुबां पर आता है,
हर वक्त बात-बात पर,
हम ढल ग‌ए हैं वक्त के साथ-साथ,
जीवन के कुछ कीमती पल निकल ग‌ए हैं,
वक्त के साथ-साथ,
कुछ वक्त ने सिखाया है कुछ माँ ने बताया है,
हंसते हुए जीने की कला (jeene ki kla),
हंसकर स्वीकारा जितना भी मिला,
ये उपहार मैंने माँ की कोख से पाया है,
मैं उस प्यारी माँ का जाया हूँ,
जिस माँ ने मुझको हर पल हंसना सिखाया है,
* * * * * *
creater -राम सैणी
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