हर चीज का हिसाब मांगती बेटी(Hisab mangti beti)है आपकी,
हर बात का जवाब मांगती है बेटी आपकी,
क्या ये सब सिखाया है बेटी को आप ने,
ससुराल में कैसे रहना है,
सर झूकाकर,हाँ में सर हिलाना है,
ये सब सिखाना चाहिए,
एक बेटी के बाप ने,
नापतोल कर बोलना चाहिए,
अपने बुजुर्गो का स्वागत ,
दिल खोलकर करना चाहिए,
जीवन जीने की कला आनी चाहिए हर हालत में
हर चीज का हिसाब मांगती बेटी(Hisab mangti beti)है आपकी,
हर बात का जवाब मांगती है बेटी आपकी,
क्या ये सब सिखाया है बेटी को आप ने,
* * * * * *
अपने से बड़ों के आगे बोलना,
बात-बात पर मुंह खोलना,
ये सब अच्छे संस्कार नहीं हैं,
चेहरे पर सिलवटें पाकर रखना,
हर बुरी आदत का होना,
ये सब अच्छे संस्कार नहीं हैं,
सर पर दुपट्टे का ताज हो,
घर की बहू की धीमी आवाज हो,
ये एक संस्कारी बहू की निशानी है,
सास-ससुर का सम्मान हो,
अपने मायके का ना ज्यादा गुणगान हो ,
समझदारी से काम करें,
ये एक संस्कारी बहू की निशानी है,
मुंह से रसधार बहे हर पल जी-जी कहे,
ये सब क्यों नहीं सिखाया तुम्हारे माँ-बाप ने,
हर चीज का हिसाब मांगती बेटी(Hisab mangti beti)है आपकी
क्या ये सब सिखाया है बेटी को आप ने,
ससुराल में कैसे रहना है,
सर झूकाकर,हाँ में सर हिलाना है,
ये सब सिखाना चाहिए,
एक बेटी के बाप ने,
* * * * * *
हिसाब मांगती बेटी(Hisab mangti beti) : मजबूत पंखों वाली बेटी

मैं नाजों से पली,घर में थी सब की लाड़ली,
मुझे फूलों की तरह रखा है मेरे माँ-बाप ने,
ईश्वर के आगे सर झुकाना,हर घड़ी मुस्कराना,
गुड़िया की तरह रखा है मेरे माँ-बाप ने,
खाने-पीने पर ना कोई रोक-टोक,
पूरे होते थे हमारे सब शौंक,
माँ-बाप की मैं करती बंदगी थी,
सीधी-सादी -सी अपनी जिंदगी थी,
नींद आँखों में,सच्चाई बातों में,
कुछ हद से ज्यादा थी,
सुबह-सुबह माँ का काम था नींद से जगाना,
फिर घर के काम में उसका हाथ बंटाना,
किस्मत हम पर कुछ हद से ज्यादा फिदा थीं,
मैंने अपने जीवन की चाबी सौंपी है,
अपने माँ-पिता के हाथ में,
हर चीज का हिसाब मांगती बेटी(Hisab mangti beti)है आपकी,
हर बात का जवाब मांगती है बेटी आपकी,
क्या ये सब सिखाया है बेटी को आप ने,
* * * *
ना आँखों में नमी थी,ना कोई कमी थी,
पिता ने संभाली थी घर की कमान,
जिस चीज पर हाथ रखा वो मेरी थी,
माँ मेरी सच्ची सहेली थी,
ना चेहरे पर आए कभी गम के निशान,
हमेशा दिल की धड़कन बनाकर रखा,
हमारे प्यारे माँ-बाप ने,
हर चीज का हिसाब मांगती बेटी(Hisab mangti beti)है आपकी,
हर बात का जवाब मांगती है बेटी आपकी,
क्या ये सब सिखाया है बेटी को आप ने,
ससुराल में कैसे रहना है,
सर झूकाकर,हाँ में सर हिलाना है,
ये सब सिखाना चाहिए,
* * * * * *
मुझे धीरे-धीरे रास आएगा,
सासू माँ आपका परिवार,
मुझे चाहिए घर में एक बहू का अधिकार,
कीमती गहनों से भरे थे आपके हाथ,
दहेज के सामान के साथ,
संस्कारों का कहीं जिक्र नहीं था,
आप सबका मुंह सिल दिया था,
हमारे माँ-बाप ने सोने की तार से,
फिर क्या नाता था आपका,
अपनी बहू के संस्कार से,
उस वक्त संस्कारों का किसी को फ़िक्र नहीं था,
आपकों गहनों से सजी बहू चाहिए थी,
संस्कारों वाली नहीं,
आपको दहेज से भरा घर चाहिए था,
बहू,दो जोड़ी कपड़ों वाली नहीं,
आपके घर का कोना-कोना भर दिया था,
दहेज से हमारे माँ-बाप ने,
हर चीज का हिसाब मांगती बेटी(Hisab mangti beti)है आपकी,
हर बात का जवाब मांगती है बेटी आपकी,
क्या ये सब सिखाया है बेटी को आप ने,
ससुराल में कैसे रहना है,
सर झूकाकर,हाँ में सर हिलाना है,
ये सब सिखाना चाहिए,
एक बेटी के बाप ने,
* * * * * *
creation -राम सैणी
read more sweet poetry
click here–> किस्मत के द्वार( kismat ke dwar ) खोलती बेटियाँ: पिता का मान
click here–>बड़ी माँ का दुलारा शिवम(dulara Shivam ) : स्वभाव में अपनापन



