हर पल मीठा खाना मीठा बोलना,
माँ को बहुत भाता है,
जब भी बोले हर शब्द में मिठास (har shabad me mithas ) घोले,
रिश्तों में मिठास भरना माँ को अच्छे से आता है,
* * * * * *
मीठे जल को मीठे फल को,
माँ बड़े चाव से खाती है,
बिन मिठास के जीवन है शून्य,
माँ ये हम-सब को सिखाती है,
हर छोटी बात को बना देती है खास,
चेहरा अगर किसी का माँ को नज़र आए उदास,
मैं हूँ ना बोलती है चेहरे पर मुस्कान सजाकर,
बातों की धनी है माँ, छाँव बरगद की घनी है माँ,
हम-सब को रखती है अपनी जान बनाकर,
बच्चों को हंसते-खेलते देखकर,
माँ का रोम-रोम मुस्कराता है,
हर पल मीठा खाना मीठा बोलना,
माँ को बहुत भाता है,
जब भी बोले हर शब्द में मिठास (har shabad me mithas ) घोले,
रिश्तों में मिठास भरना माँ को अच्छे से आता है,
* * * * * *
कभी दिल में मत पालकर रखना,
तुम नफ़रत की दीवार को ,
माँ समझाती है हम सबको प्यार से बिठाकर,
हर दिल को जीतना तुम अपने प्यार से,
अपनी मीठी बोली के वार से,
प्यार ही जोड़कर रखता है इस सारे संसार को,
वो बताती है हमें प्यार से गले लगाकर,
बच्चे होते हैं ईश्वर का रूप,
बेवजह उनको मत डांटना,
हर छोटे-बड़े को अपनी जुबान से मिठास बांटना
मिठास बांटने से खुद का जीवन भी,
मिठास से भर जाता है,
हर पल मीठा खाना मीठा बोलना,
माँ को बहुत भाता है,
जब भी बोले हर शब्द में मिठास (har shabad me mithas ) घोले,
रिश्तों में मिठास भरना माँ को अच्छे से आता है,
* * * * *
मीठे बोल की महिमा है न्यारी,
भली-भांति जानती है कोयल काली,
रंग काला है पर जुबान प्यारी है,
हम सब के दिलों पर राज करे,
मीठा बोलकर कोयल काली,
मीठी बोली हर दिल पर,
अपनी गहरी छाप छोड़ती है,
जो भी सुनता है उसके दिल के तार छेडती है,
सादा खाना ईश्वर के गुण गाना,
माँ हर घड़ी ये ही पाठ पढ़ाए,
रिश्तों में मिठास घोलकर,
हर किसी को जी बोलकर जीवन जीना,
माँ हर घड़ी ये ही पाठ पढ़ाए,
कोई माँ कितनी खुश हैं,
ये उसके चेहरे का रंग बताता है,
हर पल मीठा खाना मीठा बोलना,
माँ को बहुत भाता है,
जब भी बोले हर शब्द में मिठास (har shabad me mithas ) घोले,
रिश्तों में मिठास भरना माँ को अच्छे से आता है,
* * * * * *
हर शब्द में मिठास (har shabad me mithas ) : दिल में बस जाए

प्यार देकर प्यार मिलता है,
ये ही जीवन जीने का मूल-मंत्र है,
कड़वी जुबान उदास चेहरा,
मीठी जुबान पर ईश्वर का पहरा
माँ बोले बस दोनों में ये ही अंतर है,
मीठे बोल दिलों के देते है बंद दरवाजे खोल,
उसे कोई पसंद नहीं करता है,
जो दरवाजा चूं-चूं का शोर मचाता है,
हर पल मीठा खाना मीठा बोलना,
माँ को बहुत भाता है,
जब भी बोले हर शब्द में मिठास (har shabad me mithas ) घोले,
रिश्तों में मिठास भरना माँ को अच्छे से आता है,
* * * * * *
मैं अपने अनुभव से कहती हूँ,
मैं जो हर पल मुस्कराकर रहती हूँ,
सच में स्वर्ग का सुख घर में ही मिलता है,
जीवन में जो मिला जितना भी मिला,
सर झुकाकर करें उस ईश्वर का शुक्रिया,
अगर ये ही सोचकर जीते हैं तो
सच में किस्मत का दरवाजा खुलता है,
दरिया का पानी बहता है अपनी मिठास लिए,
जल उठते हैं सांसों के दीपक,
आग बरसाती दोपहर में,
जिस ने भी दो घूंट इस मीठे पानी के पिए,
जिस घर में रिश्तों में मिठास रहती है,
जहाँ माँ को सर-आँखों पर बिठाकर रखतें हैं,
उस घर में वो दो जहां का मालिक,
खुशियों के बादल बरसाता है,
हर पल मीठा खाना मीठा बोलना,
माँ को बहुत भाता है,
जब भी बोले हर शब्द में मिठास (har shabad me mithas ) घोले,
रिश्तों में मिठास भरना माँ को अच्छे से आता है,
* * * * *
मीठे हैं पेड़ों के फल, मीठे हैं संतों के वचन,
जो सब के दिलों में घर कर जाते हैं,
मीठी है बच्चों की मुस्कान,
जिसे देखकर मिट जाती है बदन की थकान,
ये प्यारी मुस्कान दिल में घर कर जाती है,
मीठा लगता है परिंदों का चहचहाना,
मीठा लगता है भंवरों का गीत सुनाना,
मीठी लगती है बच्चों की किलकारी,
उनकी तोतली जुबान लगती है प्यारी,
बच्चे दोडे चलें आते हैं,
जो भी उन्हें प्यार से बुलाता है,
हर पल मीठा खाना मीठा बोलना,
माँ को बहुत भाता है,
जब भी बोले हर शब्द में मिठास (har shabad me mithas ) घोले,
रिश्तों में मिठास भरना माँ को अच्छे से आता है,
* * * * * *
creater-राम सैनी
must read: हर रिश्ते से ऊपर माँ (Har rishte se uper maa) : एक चमत्कार
must read: पीपल की घनी छाँव (ghani chhanv) : मिट्टी की खुशबू
Pingback: सिर्फ माँ: एक प्यारी सौगात (maa Ek Pyari Saugaat )