माँ दूर करो सब चिंता-परेशानी,
मैं जब तुम से हो जाऊंगी बेगानी,
बस मुझे प्यारी-सी एक निशानी (ek nishani ) दे देना,
मुझे नहीं चाहिए कोई दान-दहेज,
मैं करती हूँ इन सबसे परहेज,
बस सर पर दुपट्टे का रंग आसमानी दे देना,
* * * * * *
हमें चलना है साथ जमाने के,
सब रीती-रिवाज निभाने हैं,
एक तुम्हें छोड़कर बस मेरी लाडो,
बाकी सब लोग शयाने हैं,
कुछ फर्ज निभाने होते हैं,
बेटी की विदाई से पहले,
सर ऊँचा रखना पड़ता है,
जग हंसाई से पहले,
मैंने तुम को जन्म दिया है,
तुम को पाला-पोसा है,
थोड़ा-बहुत तो देते हैं हर माता-पिता,
क्योंकी आने वाले कल का क्या भरोसा है,
बेटी संग हों कीमती गहने,
फिर ससुराल में उसके क्या कहने,
मैं हाथ जोड़कर करती हूँ प्रार्थना,
हे ईश्वर मेरी बेटी को एक खुशहाल जिंदगानी दे देना,
माँ दूर करो सब चिंता-परेशानी,
मैं जब तुम से हो जाऊंगी बेगानी,
बस मुझे प्यारी-सी एक निशानी (ek nishani ) दे देना,
मुझे नहीं चाहिए कोई दान-दहेज,
मैं करती हूँ इन सबसे परहेज,
बस सर पर दुपट्टे का रंग आसमानी दे देना,
* * * * * *
कुछ मात-पिता का फर्ज भी है,
कुछ बेटी का उपर कर्ज भी है,
जिसे हम-सब को एक दिन चुकाना है,
अपने ससुराल में बेटी खुश रहे,
भरपूर मिले उसे मान-सम्मान,
नए दिलों में घर बनाना,
एक बेटी के लिए नहीं होता आसान,
मैं उस ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ हर दिन
जहाँ रानी बनकर राज़ करें मेरी गुड़िया,
ऐसा कोई घर खानदानी दे देना,
माँ दूर करो सब चिंता-परेशानी,
मैं जब तुम से हो जाऊंगी बेगानी,
बस मुझे प्यारी-सी एक निशानी (ek nishani ) दे देना,
मुझे नहीं चाहिए कोई दान-दहेज,
मैं करती हूँ इन सबसे परहेज,
बस सर पर दुपट्टे का रंग आसमानी दे देना,
* * * * * *
जब बेटी दी है फिर दहेज क्यों,
दो कपड़ों में विदा हो बेटी,
फिर इससे किसी को परहेज है क्यों,
दान-दहेज से ज्यादा कीमती,
मेरे पास विद्या का भरपूर खजाना है,
फिर बेवजह किसी के घर को,
क्यों नश्वर चीजों से सजाना है,
मेरा रहन-सहन अलग,मेरी सोच अलग है,
मैं बेटी हूँ नए जमाने की,
जब ईश्वर का दिया सब-कुछ है घर में,
फिर क्यों ज़रुरत है दहेज ले जाने की,
दान-दहेज लालच की है निशानी,
माँ दूर करो सब चिंता-परेशानी,
मैं जब तुम से हो जाऊंगी बेगानी,
बस मुझे प्यारी-सी एक निशानी (ek nishani ) दे देना,
मुझे नहीं चाहिए कोई दान-दहेज,
मैं करती हूँ इन सबसे परहेज,
बस सर पर दुपट्टे का रंग आसमानी दे देना,
* * * * * *
बस एक निशानी (ek nishani ) : आसमानी दुपट्टा

मेरे मेहनती हाथ वो थामेगा,
जिसकी औकात हो मेरी डोली ले जाने की,
मैं बता रहीं हूँ माँ साफ-साफ,
ज्यादा बोल दिया हो तो कर देना माफ,
गहनों से कीमती हैं मेरे संस्कार,
छोटे-बडे का लिहाज करना,
ये सब दिया है आपने मुझको उपहार,
जिसे सुनकर मैं खुश रहूं ससुराल में,
उपहार स्वरूप मेरे बचपन की,
कोई कीमती निशानी दे देना,
माँ दूर करो सब चिंता-परेशानी,
मैं जब तुम से हो जाऊंगी बेगानी,
बस मुझे प्यारी-सी एक निशानी (ek nishani ) दे देना,
मुझे नहीं चाहिए कोई दान-दहेज,
मैं करती हूँ इन सबसे परहेज,
बस सर पर दुपट्टे का रंग आसमानी दे देना,
* * * * * *
बेटियां होती है चिड़ियों के जैसे,
जिन्को एक दिन उड़ जाना है,
हर माता-पिता को एक दिन,
बेटी की विदाई का हंसकर फर्ज निभाना है,
बेटी नहीं तूं मेरी सखी है,
मेरे रोम-रोम में एक तूं ही बसी है,
हम आँखों से पड़ लेते हैं,
एक-दुजे की दिल की बातें,
तेरी याद बहुत सताएगी,
जब तूं दुल्हन बनकर जाएगी,
जब आएगी घड़ी विदाई की,
कुछ घबराएगी कुछ शर्माएगी,
मेरी चाँद-सी बेटी श्यानी,
माँ दूर करो सब चिंता-परेशानी,
मैं जब तुम से हो जाऊंगी बेगानी,
बस मुझे प्यारी-सी एक निशानी (ek nishani ) दे देना,
मुझे नहीं चाहिए कोई दान-दहेज,
मैं करती हूँ इन सबसे परहेज,
बस सर पर दुपट्टे का रंग आसमानी दे देना,
* * * * * *
तुझे हर पल देखने की मेरी आदत जो है,
अब कभी-कभी होंगी हमारी मुलाकातें,
एक अनजाना सा दिल में है डर
ईश्वर करे तेरा हो एक प्यारा सा घर,
तूं सबकी चहेती बन कर रहे,
हर घड़ी हो उस घर में तेरा आदर,
माँ तूं मत डर वो है ना ईश्वर ,
जब घर से विदा मैं होने लगूं,
मुझे अपनी एक तस्वीर रुहानी दे देना,
माँ दूर करो सब चिंता-परेशानी,
मैं जब तुम से हो जाऊंगी बेगानी,
बस मुझे प्यारी-सी एक निशानी (ek nishani ) दे देना,
मुझे नहीं चाहिए कोई दान-दहेज,
मैं करती हूँ इन सबसे परहेज,
बस सर पर दुपट्टे का रंग आसमानी दे देना,
* * * * * *
creater-राम सैणी
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