Last updated on January 25th, 2026 at 11:01 am
मेरे साथ नहीं खेलती कोई सखी-सहेली,
माँ सारा दिन रहती हूँ मैं घर में अकेली,
मैं रब से मांगकर लाऊंगी एक भाई (ek bhai ) को,
हंसमुख चेहरा तोतली जुबान,
मैं बनाकर रखूंगी उसे अपनी जान,
माँ हम उस पर खर्च करेंगे हर रोज,
अपनी नेक कमाई को,
मैं रब से मांगकर लाऊंगी एक भाई (ek bhai ) को,
* * *
मैंने बोल दिया है माँ गली में सब से,
मैं मांगकर लाऊंगी एक भाई को रब से,
वो टालता नहीं मेरी किसी बात को,
जो सखी-सहेलियां मुझको चिड़ाती हैं,
बात-बात पर नखरे दिखाती हैं,
वो तरसेंगी फिर मेरे साथ को,
माँ रब पर है मुझे भरोसा,
एक दिन वो जमकर बरसेगा,
माँ सब कहते हैं बच्चे रब का रूप होते हैं,
वो मेरी प्रार्थना जरूर स्वीकार करेगा,
वो पूरी मेरी पुकार करेगा,
क्योंकी बच्चे रब का स्वरूप होते हैं,
माँ वो खुशियों भरे दिन आने वाले हैं,
जब हर कोई आकर बोलेगा,
आपको नए मेहमान की बधाई हो,
मेरे साथ नहीं खेलती कोई सखी-सहेली,
माँ सारा दिन रहती हूँ मैं घर में अकेली,
मैं रब से मांगकर लाऊंगी एक भाई (ek bhai ) को,
* * * * * * *
बिन भाई के बचपन है क्या,
जैसे हो कोई बुरी सजा,
मेरे दिल में प्यार उमड़ रहा है,
समंदर की लहरों की तरह,
मैं हमेशा चमकते रहना चाहती हूँ,
आसमान के तारों की तरह,
वो आराम ना करने देगा,
एक पल भी मेरी आई को,
मेरे साथ नहीं खेलती कोई सखी-सहेली,
माँ सारा दिन रहती हूँ मैं घर में अकेली,
मैं रब से मांगकर लाऊंगी एक भाई (ek bhai ) को,
* * * * * * *
जी नहीं अभी नहीं,मेरी भोली चुटकी,
पहले परवाह करना सीख तूं खुद की,
पहले बाल बनाना सीख तूं खुद से,
फिर आगे रब की मर्जी है,
तूं पहले खुद से खाना-पीना सीख ले,
अकेले आना-जाना सीख ले,
फिर जो रब की मर्जी है,
कितनी प्यारी-प्यारी बातें करती है,
सब का मन मोह लेती है मेरी चुटकी,
तेरे हाथ से छूट घर की कमान जाएगी,
तूं एक दिन में परेशान हो जाएगी,
हरकतें देखकर उस नटखट की,
वो बात-बात पर तुझे तंग करेगा,
कभी आँखें खोलेगा कभी बंद करेगा,
वो जानबूझ कर यूं दिखाएगा,
जैसे उसकी आँखों में नींद आई हो,
मेरे साथ नहीं खेलती कोई सखी-सहेली,
माँ सारा दिन रहती हूँ मैं घर में अकेली,
मैं रब से मांगकर लाऊंगी एक भाई (ek bhai ) को,
* * * * * * *
रब से मांगकर लाऊंगी एक भाई (ek bhai ) : मेरा सच्चा दोस्त

मेरी गोद में तूं अपने भाई को देखकर,
मुझसे रुठोगी तो नहीं,
वो जिद्द करेगा हर बात में,
वो पसंद नहीं करेगा एक पल भी,
तेरे हाथों को मेरे हाथ में,
फिर मुझसे रुठेगी तो नहीं,
नहीं रुठुंगी नहीं रूठुंगी नहीं रूठुंगी,
माँ एक पल भी नहीं छोडूगी,
मैं अपने प्यारे से नन्हे-मुन्ने की कलाई को,
मेरे साथ नहीं खेलती कोई सखी-सहेली,
माँ सारा दिन रहती हूँ मैं घर में अकेली,
मैं रब से मांगकर लाऊंगी एक भाई (ek bhai ) को,
* * * * * * *
मैं अपने हाथ से उसके पालने को हिलाऊंगी,
खुद से उसको खाना खिलाऊंगी,
उसके गालों पर दूंगी एक जोर से तमाचा,
जो दिखाएगा मुझे रो-कर बार-बार,
मैं पीछे-पीछे दौड़ूंगी उस नन्हे-मुन्ने के,
वो जब मुझे दौडाएगा,
मैं दौड़कर उसे अपनी बाहों में उठा लूंगी,
वो जब अपनी बांहें फैलाएगा ,
हर तीज-त्योहार पर,मैं जी-भरकर,
उस से हरे-हरे रंग नोट (रुपए ) लिया करुंगी,
वो रूठ कर बैठ जाया करेगा,
मैं जब तुम्हारे हाथों से पानी पिया करूंगी,
मैं उसकी पहरेदार बनकर रहूंगी,
कोई छू भी नहीं पाएगा उसकी परछाई को,
मेरे साथ नहीं खेलती कोई सखी-सहेली,
माँ सारा दिन रहती हूँ मैं घर में अकेली,
मैं रब से मांगकर लाऊंगी एक भाई (ek bhai ) को,
* * * * * * *
मैं उसका घोड़ा बन जाऊंगी,
उसे अपनी पीठ पर सवारी कराऊंगी,
लोट-पोट कर दूंगी मैं नन्हें -मुन्ने को हंसाकर,
वो बोलेगा जब मुझे चुटकी तोतली जुबान से,
मैं उसे गले से लगा लूंगी अपनी बांहें फैलाकर,
वो रोएगा मैं उसे चुप कराऊंगी,
अपनी छोड़कर लिखाई-पडाई को,
मेरे साथ नहीं खेलती कोई सखी-सहेली,
माँ सारा दिन रहती हूँ मैं घर में अकेली,
मैं रब से मांगकर लाऊंगी एक भाई (ek bhai ) को,
* * * * * * *
creater-राम सैणी
read more
click here:—> हर शब्द में मिठास (har shabad me mithas ) : मीठे रिश्ते
click here:—> हर रिश्ते से ऊपर माँ (Har rishte se uper maa) : एक चमत्कार



