ससुराल अमीर नहीं है तो कोई बात नहीं,
लेकिन हमसफ़र दिल का अमीर ( dil ka amir ) चाहिए,
मेरी गलतियां छूपाए,मुझसे वफ़ा निभाए,
ये वादा मुझे पत्थर पर लकीर चाहिए,
इतना तो मांग सकती हूँ रब से,
मैंने अपने जीवन की डोर,
हमसफ़र के हाथों में छोड़ दी है जब से,
मैंने जैसे सोचा था वैसे ही पाया है,
मात-पिता ने जिसके हाथों में,
मेरा हाथ थमाया है,
वो मुझे कम समय देगा तो कोई बात नहीं,
लेकिन हमसफ़र की आँखों में,
मुझे अपनी तस्वीर चाहिए ,
ससुराल अमीर नहीं है तो कोई बात नहीं,
लेकिन हमसफ़र दिल का अमीर ( dil ka amir )चाहिए,
मेरी गलतियां छूपाए,मुझसे वफ़ा निभाए,
ये वादा मुझे पत्थर पर लकीर चाहिए,
* * * * * *
ससुराल अमीर नहीं है तो समझोता कर लूंगी,
मेरे सपने पूरे नहीं हुए तो समझौता कर लूंगी,
बात-बात पर गीले-शिकवे नहीं करुंगी,
कायदे-कानून से हमेशा चलूंगी,
कोई ऊँचा बोलेगा कोई बात नहीं,
नफ़रत का दिल में कोई स्थान नहीं,
ज्यादा ऊँची मेरी उड़ान नहीं,
एक छोटी सी छत हो सर पर,
एक छोटी सी मुस्कान से स्वागत हो घर पर,
वो मेरे सपनों में रंग ना भरे तो कोई बात नहीं,
लेकिन मुझे अपने प्यार के ऱंग में रंगी ,
हमसफ़र के दिल की हर दीवार चाहिए,
ससुराल अमीर नहीं है तो कोई बात नहीं,
लेकिन हमसफ़र दिल का अमीर ( dil ka amir ) चाहिए,
मेरी गलतियां छूपाए,मुझसे वफ़ा निभाए,
ये वादा मुझे पत्थर पर लकीर चाहिए,
* * * * * *
मायके जैसा परिवार हो,
परिवार में प्यार ही प्यार हो,
बस इतनी सी खवाईस है दिल में,
दिल से दिल का नाता हो,
एक आवाज से हर कोई दौडा आता हो,
सब मिलकर साथ खड़ें हों,
जब भी कोई हो मुश्किल में,
शौंक नहीं है हाथी-घोड़े का,
ना ज्यादा का अभिमान है,
ना ग़म है जीवन में थोड़े का,
हमसफ़र मुझे पलकों पर ना बिठाए,
तो कोई बात नहीं,
लेकिन हमसफ़र दिल का दानवीर चाहिए,
ससुराल अमीर नहीं है तो कोई बात नहीं,
लेकिन हमसफ़र दिल का अमीर ( dil ka amir )चाहिए,
मेरी गलतियां छूपाए,मुझसे वफ़ा निभाए,
ये वादा मुझे पत्थर पर लकीर चाहिए,
* * * * *
दिल का अमीर ( dil ka amir ) हमसफ़र : रिश्ते की असली अमीरी

घर के बड़े काम में मुझसे राय ले,
मैं सदा झूककर चलूंगी,
अगर वो भी थोड़ा सर झूका ले,
मैं सास को अपनी माँ बनाकर रखूंगी,
अगर वो मुझे अपनी बेटी बना ले,
सास और बहू के बीच में,
हमसफ़र एक कड़ी बनकर रहे,
घर के जिस भी कोने में उसे अंधकार लगे,
वो उस कोने में दीपों की लडी बनकर रहे,
कभी मेरी कोई बात दिल को ठेस पहुंचाए तो,
हमसफ़र मुझे एकांत में बताए,
कभी सासु माँ के साथ कोई खींचा-तानी हो तो,
हम दोनों को प्यार से समझाए,
वो मुझे कभी प्यार से डांटे,
तो कोई बात नहीं,
लेकिन हमसफ़र मुझे रिश्तों में वफादार चाहिए,
ससुराल अमीर नहीं है तो कोई बात नहीं,
लेकिन हमसफ़र दिल का अमीर ( dil ka amir ) चाहिए,
मेरी गलतियां छूपाए,मुझसे वफ़ा निभाए,
ये वादा मुझे पत्थर पर लकीर चाहिए,
* * * * * *
बड़े-बुजुर्गों का आदर करना,
माँ ने बचपन से सिखाया है,
परिवार में हर छोटे-बड़े के दिल में घर करना,
माँ ने बचपन से सिखाया है,
उसकी आँखों में प्यार ही प्यार हो,
मैंने जिसे अपना संसार बनाया है,
ज्यादा नहीं,दो पल बैठकर प्यार से बात करें,
मैंने जिसे अपने जीवन का हकदार बनाया है,
उनके मुख पर सदा खुशियों का उजाला हो,
इससे ज्यादा कुछ और नहीं चाहिए,
घर की इकलौती बहु बृजबाला को,
वो मेरी तारीफ ना करें तो कोई बात नहीं,
लेकिन हमसफ़र के दिल में,
मुझे अपनी मोहब्बत की जागीर चाहिए,
ससुराल अमीर नहीं है तो कोई बात नहीं,
लेकिन हमसफ़र दिल का अमीर ( dil ka amir ) चाहिए,
मेरी गलतियां छूपाए,मुझसे वफ़ा निभाए,
ये वादा मुझे पत्थर पर लकीर चाहिए,
creation -राम सैणी
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