(Dahej ka karz)

दहेज का कर्ज (Dahej ka karz) : पिता का बोझ

मेरे दहेज के फरनिचर का रंग उतर गया
लेकिन मेरे बाप के सिर पर
दहेज का कर्ज (Dahej ka karz) अभी बाकी है ,
मेरे पिता का आधा जीवन गुजर गया है,
लेकिन मेरी दो छोटी बहनों की शादी का
मेरे पिता जी का फर्ज अभी बाकी है,
मैं जब भी देखती हूँ बुझे हुए मन से,
अपने दहेज का फैंसी फरनिचर,
मुझे शादी के नाम से नफरत होने लगती है,
मैं जब भी देखती हूँ गौर से,
अपने पिता का झुका हुआ सिर,
मुझे शादी के नाम से नफरत होने लगती है,
हमारे घर की दीवारों का दिखता है खुरदरापन,
लेकिन मेरे बाप के सिर पर
दहेज का कर्ज (Dahej ka karz) अभी बाकी है ,
*          *         *          *          *
मैंने देखा अपने बाप को,रात में जागते हुए,
हर दिन गुजरता है मेरे बाप का,
मेरे दहेज का कर्ज कैसे उतरेगा,
हर घड़ी ये ही सोचते हुए ,
ससुराल वालों ने मांगा है दिल खोलकर,
अपना हक समझते हुए,
सीना तानकर लिया है,
खुद को बडा समझते हुए,
मेरी सास का बहुत बड़ा दिल है,
घर में सामान इतना है की,
नंगे पाँव गुजरना मुश्किल है,
सास ने हाथ जोड़कर नकली मुस्कान से कहा
हमे बहू दो कपड़े जोडी में ही काफी है,
मेरे दहेज के फरनिचर का रंग उतर गया
लेकिन मेरे बाप के सिर पर
दहेज का कर्ज (Dahej ka karz) अभी बाकी है ,
मेरे पिता का आधा जीवन गुजर गया है,
लेकिन मेरी दो छोटी बहनों की शादी का
मेरे पिता जी का फर्ज अभी बाकी है,
*          *         *          *          *
ससुराल था थोडा औकात से बडा,
अपने हाथों के लिए चाहिए था,
सास को सोने का कड़ा,
ससुर थोडा नरम दिल था,
एक दम लगता था भोला-भाला ,
जैसे हो कोई संत-फकीर,
उसकी एक छोटी सी मांग थी,
बस गले में हो एक सोने की जंजीर,
मेरे बाप ने चुपचाप सह ली ,
बेटी के ससुराल की चालाकी है,
मेरे दहेज के फरनिचर का रंग उतर गया
लेकिन मेरे बाप के सिर पर
दहेज का कर्ज (Dahej ka karz) अभी बाकी है ,
मेरे पिता का आधा जीवन गुजर गया है,
लेकिन मेरी दो छोटी बहनों की शादी का
मेरे पिता जी का फर्ज अभी बाकी है,
*          *         *          *          *
सहेली से बढ़कर एक जीजी है,
मेरे प्यारे ससुराल में,
हर कोई फस जाता है,
उसकी मीठी बातों के जाल में,
वो एक सोसल वर्कर है,
दहेज के खिलाफ,खुलकर बोलती है,
दहेज लेना और देना दोनों अपराध है,
जब मांगने की बात आती है तो,
वो अपनी मांग का बड़ा सा पिटारा खोलती है,
कभी अपनापन दिखाती है,
कभी थोडा शरमाती है,
मेरे दहेज के फरनिचर का रंग उतर गया
लेकिन मेरे बाप के सिर पर
दहेज का कर्ज (Dahej ka karz) अभी बाकी है ,
मेरे पिता का आधा जीवन गुजर गया है,
लेकिन मेरी दो छोटी बहनों की शादी का
मेरे पिता जी का फर्ज अभी बाकी है,
*          *         *          *          *

 दहेज का कर्ज (Dahej ka karz) :  पिता का दर्द

 

(Dahej ka karz)
(Dahej ka karz)

मेरी जीजी भोली जनता को बहुत ज्ञान बांटती है,
लेकिन अपनी उंगलियों का बहुत ध्यान रखती है
उसे कांच की चुड़ियों से बहुत नफ़रत है,
लेकिन सोने की चुड़ियों पर,
वो दिल-जान से मरती है,
जब दहेज लेने की बात आई तो,
वो बार-बार अपनी उंगलियों को आगे करती है
ये तो उसके लालच के पिटारे की,
एक छोटी सी झांकी है,
मेरे दहेज के फरनिचर का रंग उतर गया
लेकिन मेरे बाप के सिर पर
दहेज का कर्ज (Dahej ka karz) अभी बाकी है ,
मेरे पिता का आधा जीवन गुजर गया है,
लेकिन मेरी दो छोटी बहनों की शादी का
मेरे पिता जी का फर्ज अभी बाकी है,
*          *         *          *          *
एक और शख्स के लिए अभी,
मेरा दिल बोलना चाहता है,
मेरा पति बिल्कुल ग‌ऊ माता लगता है,
सबके दुख-तकलीफ सुनता है,
बस एक मुझे छोड़कर,
ऐसी बातों ने मुझे रखा है,अंदर से तोड़कर,
शक्ल पर भोलापन झलकता है,
थोड़े से परोपकारी,थोड़े से जज्बाती हैं,
मेरे दहेज के फरनिचर का रंग उतर गया
लेकिन मेरे बाप के सिर पर
दहेज का कर्ज अभी बाकी है ,
मेरे पिता का आधा जीवन गुजर गया है,
लेकिन मेरी दो छोटी बहनों की शादी का
मेरे पिता जी (Dahej ka karz) का फर्ज अभी बाकी है,
*          *         *          *          *
मेरे बाप ने दो पहिया वाहन दिया है,
अपने हाथों को सिंकोड़कर,
मन में गाड़ी का सपना था मेरे पति का,
लेकिन जो मिला, लें लिया हाथ जोड़कर,
मेरे बाप ने आज फिर कर्ज उठाया है,
पता नहीं किस -किस के आगे,
फिर से अपना सर झुकाया है,
मेरी छोटी बहनों के,करने हैं हाथ पीले,
ये सोचकर उनके नयन हो जाते हैं गीले,
दो बहनों को अच्छे से विदा किया है,
अपने बाप होने का फर्ज‌ अच्छे से अदा किया है,
पिछला कर्ज अभी बाकी है,ये कैसे उतरेगा,
ये ही सोच-सोच कर मेरे बाप का,
आज फिर से चेहरे का रंग उड गया है,
मेरे दहेज के फरनिचर का रंग उतर गया
लेकिन मेरे बाप के सिर पर
दहेज का कर्ज (Dahej ka karz) अभी बाकी है ,
मेरे पिता का आधा जीवन गुजर गया है,
लेकिन मेरी दो छोटी बहनों की शादी का
मेरे पिता जी का फर्ज अभी बाकी है,
*          *         *          *          *
Creater-राम सैणी
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