google.com, pub-4922214074353243 , DIRECT, f08c47fec0942fa0
बेटा कहकर पुकारा (beta kahkar pukara )

बेटा कहकर पुकारा (beta kahkar pukara ): कुदरत का चमत्कार

मानों कुदरत ने आज धरती पर स्वर्ग उतारा है,
मेरी माँ ने आज मुझे बेटा कहकर पुकारा (beta kahkar pukara ) है,
कब से तरस रहे थे मेरे कान,
माँ की सुनने को मीठी जुबान ,
तन-मन खिल गया मेरा सारा है,
मेरी माँ ने आज मुझे बेटा कहकर पुकारा (beta kahkar pukara ) है,
*         *         *         *         *         *         *         *
मैंने देखा है बचपन से अपने बुझे हुए मन से,
माँ इशारों से बात करती थी,
कभी घर की दीवारों से,
कभी आसमान के सितारों से, बात करती थी,
माँ बोलना चाहती थी बहुत कुछ,
पर मुख से आवाज नहीं आती थी,
माँ की आवाज ना जाने गले के,
किस हिस्से में अटक गई थी,
खुशियां दस्तक देती थी बार-बार दरवाजे पर,
ये खुशियां ना जाने क्यों रास्ता भटक गई थी ,
सब को खुशियां बांटने वाली माँ का,
एक ना एक दिन खिल जाएगा चेहरा है,
मानों कुदरत ने आज धरती पर स्वर्ग उतारा है,
मेरी माँ ने आज मुझे बेटा कहकर पुकारा (beta kahkar pukara ) है,
कब से तरस रहे थे मेरे कान,
माँ की सुनने को मीठी जुबान ,
तन-मन खिल गया मेरा सारा है,
मेरी माँ ने आज मुझे बेटा कहकर पुकारा (beta kahkar pukara ) है,
*         *         *         *         *         *         *         *
मुझे बार-बार याद दिलाया करते थे,
मेरी हम‌उमर के मित्र सारे,
माँ बोले नहीं पाती दिल के राज खोल नहीं पाती ,
पता नहीं कैसे दिन गुजरते हैं तुम्हारे,
सब की बातें दिल में शूल के जैसे चुबती थी,
मेरा भी एक दिन भला करेगा,
जो सबका करता भला है,
रब की मर्जी के आगे किस का जोर चला है,
पता नहीं ये कुदरत का कैसा खेल न्यारा है,
मानों कुदरत ने आज धरती पर स्वर्ग उतारा है,
मेरी माँ ने आज मुझे बेटा कहकर पुकारा (beta kahkar pukara ) है,
कब से तरस रहे थे मेरे कान,
माँ की सुनने को मीठी जुबान ,
तन-मन खिल गया मेरा सारा है,
मेरी माँ ने आज मुझे बेटा कहकर पुकारा (beta kahkar pukara ) है,
*         *         *         *         *         *         *         *
मैं उसके मन की बातों को,
बिन बोले समझ जाता था,
माँ जब भी मुझे हाथ के इशारे से बुलाती थी,
मैं दौड़ा-दौड़ा चला आता था,
माँ मुझे प्यार जताती थी,
अपने सीने पर सुलाकर ,
वो खुश होती थीं मुझे अपने हाथों से खिलाकर,
माँ बोल नहीं पाती है मुख से,
ये एहसास मुझे कभी होने नहीं दिया,
वो बिन बोले मुझसे बातें करती थी,
अपने सीने की धड़कन सुनाकर,
खुद हंसती थी मुझे हंसाती थी,
मुझे एक पल भी रोने नहीं दिया,
मेरे चेहरे पर तनाव की लकीरें,
उसे एक पल भी ना गवांरा है,
मानों कुदरत ने आज धरती पर स्वर्ग उतारा है,
मेरी माँ ने आज मुझे बेटा कहकर पुकारा (beta kahkar pukara ) है,
कब से तरस रहे थे मेरे कान,
माँ की सुनने को मीठी जुबान ,
तन-मन खिल गया मेरा सारा है,
मेरी माँ ने आज मुझे बेटा कहकर पुकारा (beta kahkar pukara ) है,
*         *         *         *         *         *         *         *

बेटा कहकर पुकारा (beta kahkar pukara ): माँ की मीठी आवाज़

 

बेटा कहकर पुकारा (beta kahkar pukara )
बेटा कहकर पुकारा (beta kahkar pukara )

वो मांगती थी दुआएं मेरी लंबी उम्र की,
जब मुझे निहारतीं थी बड़े ध्यान से,
मैं भी हर सुबह झूकता था रब के चरणों में ,
माँ कब मुझे बेटा कहकर बुलाएगी,
अपनी मीठी-मीठी जुबान से,
जिस दिन माँ मुझे बोलकर लगाएगी गले,
उस दिन खुल जाएगा मेरी खुशियों का पिटारा है,
मानों कुदरत ने आज धरती पर स्वर्ग उतारा है,
मेरी माँ ने आज मुझे बेटा कहकर पुकारा (beta kahkar pukara ) है,
कब से तरस रहे थे मेरे कान,
माँ की सुनने को मीठी जुबान ,
तन-मन खिल गया मेरा सारा है,
मेरी माँ ने आज मुझे बेटा कहकर पुकारा (beta kahkar pukara ) है,
*         *         *         *         *         *         *         *
हम बैठ चुके थे नीम-हकीमों से हारकर,
हर दिन नजर उतारकर,
बस उस रब से थी उम्मीद आखरी,
एक रात सपने में आकर,
वो आया था एक फकीर का भेष बनाकर,
उस फकीर ने अपने कमंडल से,
एक चमत्कारी थोड़ा सा पानी माँ को पिलाया,
फिर अंतर्ध्यान हो गया मुझे चमत्कार दिखाकर,
जैसे हर सुबह उठाया करता था,
मैंने माँ को उठाया हिलाकर,
मैं समझ गया था शायद कुदरत ने ,
आज कोई किया इशारा है,
मानों कुदरत ने आज धरती पर स्वर्ग उतारा है,
मानों कुदरत ने आज धरती पर स्वर्ग उतारा है,
मेरी माँ ने आज मुझे बेटा कहकर पुकारा (beta kahkar pukara ) है,
कब से तरस रहे थे मेरे कान,
माँ की सुनने को मीठी जुबान ,
तन-मन खिल गया मेरा सारा है,
मेरी माँ ने आज मुझे बेटा कहकर पुकारा (beta kahkar pukara ) है,
*         *         *         *         *         *         *         *
मैं देखकर रह गया हक्का बक्का,
वो कुदरत  का मनभावन नजारा,
मेरी खुशी थी सातवें आसमान पर,
माँ ने मुझे अपनी मीठी जुबान से पुकारा,
मेरी माँ ने मुझे प्यार से चूमा और कहा,
आ मेरी गोद में बैठ मेरे लाल,
मैं देख रहा था उस कुदरत का ये कमाल,
हमारे आंगन में आ रहा था,
चारों दिशाओं से तेज प्रकाश,
सच में आज से खत्म हो गया,
हमारे घर का अंधियारा है,
मानों कुदरत ने आज धरती पर स्वर्ग उतारा है,
मेरी माँ ने आज मुझे बेटा कहकर पुकारा (beta kahkar pukara ) है,
कब से तरस रहे थे मेरे कान,
माँ की सुनने को मीठी जुबान ,
तन-मन खिल गया मेरा सारा है,
मेरी माँ ने आज मुझे बेटा कहकर पुकारा (beta kahkar pukara ) है,
*         *         *         *         *         *         *         *
creater-राम सैणी

                                   read more
click here –> पत्थर पर लकीर (patthar par lakeer) : माँ का आदेश

click here–>आंचल की पनाह (aanchal ki panah) : मुझे कर दो क्षमा

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top