( kaala rang )

काला रंग ( kaala rang ) ईश्वर की रचना : उजला चरित्र

काला रंग ( kaala rang ) है ईश्वर की रचना,
हर घड़ी बस ये ही मानकर हंसना,
वो लोग होते हैं नशीबों वाले,
जो रंग के होते हैं थोडे से काले,
किसी को कभी दुख नहीं पहुंचाते,
हमेशा दिल से हंसने वाले,
चाँद कितना खूबसूरत होता है,
लेकिन उसमें भी दाग होता है,
कोई भी इंसान पूरा नहीं होता है,
कोई किसी को,कोई किसी को,
इस जगत में हमेशा रोता है,
हाथी की तरह चलना सीख,
मत देख पीछे मुड़कर,
भौंकते रह जाएंगे भौंकने वाले,
काला रंग ( kaala rang ) है ईश्वर की रचना,
हर घड़ी बस ये ही मानकर हंसना,
वो लोग होते हैं नशीबों वाले,
जो रंग के होते हैं थोडे से काले,
* * * *
आ बैठ आकर मेरे पास,
आज फिर हो गया उदास,
झूठ बोलते हैं सब मित्र तुम्हारे,
आओ गले से लग जाओ हमारे,
तूं क्यों उनकी बातों में आ जाता है,
इस प्यारे से चेहरे पर,
हर रोज क्यों गुस्सा छा जाता है,
जब तुम सज-धजकर बाहर निकलते हों,
जब तुम शेर की तरह चलतें हो,
तुम्हारे सब मित्र तुम से इर्ष्या करते हैं,
जब तुम हंसते हो तो,
मोतियों के जैसे चमकते हैं तुम्हारे सफेद दांत,
जब तुम बोलते हो तो,
दाएं-बाएं हिलते हैं तुम्हारे हाथ,
इसलिए तुम्हारे सब मित्र इर्ष्या करते हैं,
चलो फिर से मुझे हस कर दिखाओ,
चल,फिर से एक प्यारी सी हंसी,
अपने होंठों पर सजाले,
काला रंग ( kaala rang ) है ईश्वर की रचना,
हर घड़ी बस ये ही मानकर हंसना,
वो लोग होते हैं नशीबों वाले,
जो रंग के होते हैं थोडे से काले,
किसी को कभी दुख नहीं पहुंचाते,
हमेशा दिल से हंसने वाले,
* * * *
तुम मेरा दिल रखने के लिए बोल रही हो माँ,
आधा सच बोल रही हो आधा छुपा रही हो माँ,
मुझे पता है माँ मित्र कभी झूठ नहीं बोलते,
वो जो भी बोलते हैं मुख पर बोलते हैं,
वो बोलते हैं कोयल के जैसा तेरा रंग है,
तेरी सबसे अलग पसंद है,
ना बाप के जैसा दिखता है,
ना माँ की तरह मीठी जुबान,
नयन-नक्ष हैं सबसे अलग,
तेरे मुख पर हैं लाखों निशान,
वो सच का आईना दिखाते हैं,
कड़वा लगे चाहे मीठा,
वो साफ-साफ बोल जाते हैं,
माँ रंग काला होना गुनाह है क्या,
लोग सम्मान नहीं करते क्या इसके बिना ,
आज मैं सच सुनना चाहता हूँ,
किस बात में दुसरो से कम होते हैं,
जो लोग होते हैं रंग के काले,
काला रंग ( kaala rang ) है ईश्वर की रचना,
हर घड़ी बस ये ही मानकर हंसना,
वो लोग होते हैं नशीबों वाले,
जो रंग के होते हैं थोडे से काले,
किसी को कभी दुख नहीं पहुंचाते,
हमेशा दिल से हंसने वाले,
* * * *

काला रंग ( kaala rang ) ईश्वर की रचना  :  माँ की नजर में हीरा

 

( kaala rang )
( kaala rang )

कोयल जैसा रंग है तो क्या हुआ,
वो कितना मीठा गाती है,
जो भी सुन लेता है उसकी बोली,
उसके दिल में जोश भर जाता है,
बादल भी काले ही होते हैं,
जो अपने पानी से धरती की प्यास बुझाते हैं,
नयन भी काले, रातें भी काली,
पेड़ों का रंग भी काला है,
सच कहती है तेरी आई,काली है परछाई ,
दो तरह के लोग हैं दुनिया में,
एक गोरा तो दूसरा काला है,
कभी छू नहीं सकती इसे बुरी नजर,
मेरा असली हीरा है तूं,
इस बात की तुम्हें क्या है खबर,
मस्त होकर जीना सीख जरा,
छोटी-छोटी बातों से किनारा करना सीख जरा,
नफ़रत का बदला नफ़रत नहीं है,
प्यार से हर दिल में बसना,
काला रंग ( kaala rang ) है ईश्वर की रचना,
हर घड़ी बस ये ही मानकर हंसना,
वो लोग होते हैं नशीबों वाले,
जो रंग के होते हैं थोडे से काले,
किसी को कभी दुख नहीं पहुंचाते,
हमेशा दिल से हंसने वाले,
* * * *
शयाने बोल गए हैं,
मन का भेद खोल ग‌ए हैं,
काला-गोरा एक समान,
माँ के आंचल में,
दोनों की रचना करता है भगवान,
दोनों का बचपन गुजरता है,
माँ के आंचल में,
आ जाओ फिर से एक बार,
अपनी माँ के गले में पहना दो,
अपनी खूबसूरत बांहों का हार,
गोरा हो या रंग काला
दोनों को माँ का आंचल ही संभाले,
काला रंग ( kaala rang ) है ईश्वर की रचना,
हर घड़ी बस ये ही मानकर हंसना,
वो लोग होते हैं नशीबों वाले,
जो रंग के होते हैं थोडे से काले,
किसी को कभी दुख नहीं पहुंचाते,
हमेशा दिल से हंसने वाले,
*     *      *       *
creation – राम सैणी
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