सब करते हैं मेरा अभिवादन,
मुझे हर पल बांझ बोलकर,
मैं पी जाती हूँ ये कड़वे घूंट ( kadve ghoont ),
हे ईश्वर,आपका उपहार मानकर,
मैं नशीब को बहुत मानती हूँ,
एक दिन मेरी गोद भी होगी हरी-भरी,
ये मैं अच्छे से जानती हूँ,
जब किया है इतना इंतजार,
कुछ पल और सही,
जब साहा है हर किसी का रुखा व्यवहार,
कुछ पल और सही,
सब करते हैं मेरा अभिवादन,
मुझे एक पनौती मानकर,
सब करते हैं मेरा अभिवादन,
मुझे हर पल बांझ बोलकर,
मैं पी जाती हूँ ये कड़वे घूंट ( kadve ghoont ),
हे ईश्वर,आपका उपहार मानकर,
* * * * *
हर दिन तीखे शब्दों के बाण,
मेरे दिल को घायल करतें हैं,
हर किसी की जुबान पर मेरा अपमान,
ना चाहते हुए भी सहना पड़ता है,
क्यों अपनी कृपा के द्वार,
हे ईश्वर,बंद किए बैठे हो,
क्यों सबके हिस्से के ग़म,
मुझको ही दिए बैठे हो,
एक लाल जब मेरी झोली में आ जाएगा,
हर कोई मेरी तारीफ करेगा,
अपने मुख से मीठे बोल बोलकर,
सब करते हैं मेरा अभिवादन,
मुझे हर पल बांझ बोलकर,
मैं पी जाती हूँ ये कड़वे घूंट ( kadve ghoont ),
हे ईश्वर,आपका उपहार मानकर,
* * * * *
ना जाने कब पंहुचेगी मेरी पुकार,
हे ईश्वर,आपके द्वार तक,
ना जाने मेरे हिस्से का सुख,
कब पहुंचेगा मेरे द्वार तक,
हर इंसान की नजरों में जैसे,
मैं एक कांटा बनकर रहती हूँ,
कान खुले रखती हूँ पर,
अपनी जुबान बंद रखती हूँ,
मुझसे हर कोई रास्ता काट लेता है,
दूर से ही हाथ जोड़कर,
सब करते हैं मेरा अभिवादन,
मुझे हर पल बांझ बोलकर,
मैं पी जाती हूँ ये कड़वे घूंट ( kadve ghoont ),
हे ईश्वर,आपका उपहार मानकर
* * * * *
हर माँ का सपना होता है,
मीठी किलकारियों का मीठा शोर सुनना,
हर माँ चाहती है अपने बच्चे के लिए,
मीठे-मीठे सपने बुनना,
जीवन में क्या है बच्चों के बिना,
मुझे बता दीजिए मेरा गुनाह,
मैं प्रार्थनाओं की शक्ति जानतीं हूँ,
मैं बुरी बलाओं को भी मानतीं हूँ,
हे ईश्वर,कहाँ छूपकर बैठे हो,
क्यों अनजान बनकर बैठे हो,
सब-कुछ जानकर,
सब करते हैं मेरा अभिवादन,
मुझे हर पल बांझ बोलकर,
मैं पी जाती हूँ ये कड़वे घूंट ( kadve ghoont ),
हे ईश्वर,आपका उपहार मानकर
* * * * *
कड़वे घूंट ( kadve ghoont ) : बांझ शब्द का बोझ

एक तारा तोडकर हे ईश्वर,
मेरी झोली में डाल देना,
एक सिक्का मेरे नाम का भी,
इस बहती हवा में उछाल देना,
राह देख रही है हमारे आंगन की मिट्टी,
चिड़ियां भी तैयार हैं चहचाने को,
मैं भी कब से बेचैन हूँ,
एक लाल से प्यार जताने को,
मैं करुंगी उसका अभिवादन,
अपने दो हाथों में तोलकर,
सब करते हैं मेरा अभिवादन,
मुझे हर पल बांझ बोलकर,
मैं पी जाती हूँ ये कड़वे घूंट ( kadve ghoont ),
हे ईश्वर,आपका उपहार मानकर
* * * *
मेरी प्रार्थनाओं की लाज रखना,
मेरा सर भी जग में ऊँचा रखना,
पहले ज्यादा पक्की कर देना,
मेरी प्रार्थनाओं की डोर को,
मेरे कान तरस गए हैं सुनने को,
उसकी किलकारियों के मीठे शोर को,
मेरी उम्मीद में खुशियों के रंग भर देना,
मेरे चेहरे का रंग लाल कर देना,
काफी दिनों से चैन की नींद सोई नहीं हूँ,
मैं भी अब सोना चाहती हूँ,
खुशियों की चादर ओढ़कर,
सब करते हैं मेरा अभिवादन,
मुझे हर पल बांझ बोलकर,
मैं पी जाती हूँ ये कड़वे घूंट ( kadve ghoont ),
हे ईश्वर,आपका उपहार मानकर
* * * * *
उसकी जादुई किलकारियों से,
सारे आंगन को भर देना,
इस जग की सारी खुशियां,
अब तो हमारे नाम कर देना,
मैं भी तो देखूं किलकारियां का जादू क्या होता है,
वो घड़ी कैसी होगी जब वो देखेगा,
मुझे अपनी प्यारे दो नयन खोलकर,
सब करते हैं मेरा अभिवादन,
मुझे हर पल बांझ बोलकर,
मैं पी जाती हूँ ये कड़वे घूंट ( kadve ghoont ),
हे ईश्वर,आपका उपहार मानकर
* * * * *
Creater- राम सैणी
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