निराला है बड़ी माँ तुम्हारा अंदाज,
इस उम्र में भी इतना कड़क मिज़ाज ( kadak mijaj ),
तुम मीठे बोल कब बोलोगी,
तुम छोड दो सब काम-काज,
माँ के कांधों पर डाल दो,
सारे घर की जिम्मेदारी आज,
तुम ऐसा कब बोलोगी,
सारा दिन बड़ी माँ कभी यहाँ कभी वहाँ,
तुम घर में घूमती रहती हो,
मुझे पता नहीं तुम सुबह-शाम,
घर में क्या ढूंढती रहती हो,
इस उम्र में भी तुम हो जाती हो,
छोटे बच्चों के जैसे नाराज़,
सबसे निराला है बड़ी माँ तुम्हारा अंदाज,
इस उम्र में भी इतना कड़क मिज़ाज ( kadak mijaj ),
तुम मीठे बोल कब बोलोगी,
* * * * *
खुले आंगन में नीम के नीचे ,
तुम अपनी चारपाई डालकर बैठो बड़ी माँ,
अपने सर से चिंताओं व परेशानियों का,
तुम बोझ उतारकर बैठो बड़ी माँ,
आओ तुम्हारे सर में तेल की मसाज कर दूं,
आओ तुम्हारे सर को सब चिंताओं से,
मैं आज आजाद कर दूं,
आज से चलना शुरू कर दो,
बड़ी माँ,अध्यात्म की राह पर,
एक पल में भार हट जाएगा,
जो उठा रखा है आपने सर पर,
मन हलका-हलका हो जाएगा,
फिर ना रहेगा दिल पर,बेमतलब का दबाव,
सबसे निराला है बड़ी माँ तुम्हारा अंदाज,
इस उम्र में भी इतना कड़क मिज़ाज ( kadak mijaj ),
तुम मीठे बोल कब बोलोगी,
* * * *
कुछ पल शांत रहने दो घर को,
अपनी चीक-चीक के शोर से,
आज से बैठे-बिठाए बड़ी माँ,
आपको सब मिलेगा घर में,
आपकी लाडली दिव्य की ओर से,
हर रोज खाओ-पिओ शान से,
इस घर की पहचान है गाँव में,
बड़ी माँ आपके जादुई नाम से,
आपकी तीखी नजर है ऐसे,
जैसे आसमान में उडता है कोई बाज,
सबसे निराला है बड़ी माँ तुम्हारा अंदाज,
इस उम्र में भी इतना कड़क मिज़ाज ( kadak mijaj ),
तुम मीठे बोल कब बोलोगी,
* * * * *
कड़क मिज़ाज ( kadak mijaj ) : घर की नींव,बड़ी माँ

मुझे अच्छे से पता है बड़ी माँ,
बुज़ुर्गों के अंदर भी एक ,
छोटा बच्चा छिपा होता है,
मुझे अच्छे से पता है बड़ी माँ,
बुज़ुर्गों के दिल पर अपने नाती-पोतों का,
नाम छपा होता है,
हम अपने घर की दीवारों पर,
अपने बुजुर्गो की तस्वीर को रखतें हैं,
जहाँ श्रद्धा से हम सबके सर झुकते हैं,
बडा लाजवाब है बड़ी माँ,
रिशते निभाने का आपका हिसाब-किताब,
सबसे निराला है बड़ी माँ तुम्हारा अंदाज,
इस उम्र में भी इतना कड़क मिज़ाज ( kadak mijaj ),
तुम मीठे बोल कब बोलोगी,
* * * * *
आओ बड़ी माँ,इस नीम के पेड़ के विषय में,
कुछ तो बताओ बड़ी माँ,
ये नीम का पेड़ कब से छाँव दे रहा है,
हमारे खुले आंगन में,
ये कब से प्यारे-प्यारे परींदो का घर बना हुआ है,
हमारे खुले आंगन में,
ये नीम का पेड़ मेरे सुख-दुख का गवाह है,
ये नीम का पेड़ मेरे मुस्कराने की वजह है,
तुम्हारे पापा का लालन-पालन,
इसी पेड की छाँव में हुआ है,
हमने अपना जीवन इसी पेड की छाँव में जीया है,
इसी पेड की छाँव में हुआ है,
हमारी खुशियों का आगाज,
सबसे निराला है बड़ी माँ तुम्हारा अंदाज,
इस उम्र में भी इतना कड़क मिज़ाज ( kadak mijaj ),
तुम मीठे बोल कब बोलोगी,
* * * * *
तूं इतनी बातें मत बनाया कर,
हर काम में टांग मत अड़ाया कर,
दिव्य तूं चालाक तो है पर मुझसे ज्यादा नहीं,
तूं हर काम में निपुण तो है पर मुझसे ज्यादा नहीं ,
सारे घर की बागडोर रहती है हमारे हाथों में,
सुस्ती कोसों दूर रहती है,
चुस्ती हर पल रहती है हमारी आँखों में,
चप्पे-चप्पे की रहती है हमें खबर,
ईश्वर की कृपा से दिन अच्छे रहे हैं गुजर,
तूं मुझसे टकराना छोड़ दें,
आँखों से गुर्राना छ़ोड दे,
अभी तेरी उम्र है छोटी,
पढ़-लिखने पर ध्यान दें जरा,
अपनी बड़ी माँ को सम्मान दे जरा,
तूं मेरे साये में रहकर ,
अब हो गई है जांबाज,
सबसे निराला है बड़ी माँ तुम्हारा अंदाज,
इस उम्र में भी इतना कड़क मिज़ाज ( kadak mijaj ),
तुम मीठे बोल कब बोलोगी,
* * * * *
creation – राम सैणी
read more sweet poetry
click here–>चलो अब मैं संभाल लूं ( chalo ab main sanbhaal loon )
click here–>मन्नत का धागा (mannat ka dhaga) : ममता की ताकत



