अब खुद को थोडा विश्राम दो,
आपके कांधों का भार माँ,
चलो अब मैं संभाल लूं ( chalo ab main sanbhaal loon ),
एक दिन खुशियों पर बढ़त बना लेगें हम
माँ अपने पाँव रखदो हाथों पर हमारे,
आ लगा दूं इन पाँव के छालों पर,
मैं अपने प्यार का मरहम,
उम्र है छोटी पर सपने बड़े हैं,
दिल में पर्वत से हौंसले लेकर चलें हैं,
अभी और कितनी परीक्षा बाकी है,
कब तक रहेगी चेहरे पर हमारे उदासी है,
कब तक करेगी किस्मत हम पर सितम,
अब खुद को थोडा विश्राम दो,
आपके कांधों का भार माँ,
चलो अब मैं संभाल लूं ( chalo ab main sanbhaal loon ),
एक दिन खुशियों पर बढ़त बना लेगें हम
* * * * *
माँ सपनों को पूरा करने का,
मेरी आँखों में जुनून है,
मेरी रंगों में दौड़ रहा है,
तेरा दूध बनकर ख़ून है,
मुझे इस दूध की लाज निभानी है,
आज एक कसम और उठानी है,
इस आसमान को छूने का,
हमें मिल गया रास्ता,
हमारे सर पर रहे माँ,सदा तुम्हारा आसरा,
लोग कहें,इस माँ का बेटा हीरा है,
मैं जब भी रास्ते पर सीना तानकर निकलूं,
अब खुद को थोडा विश्राम दो,
आपके कांधों का भार माँ,
चलो अब मैं संभाल लूं ( chalo ab main sanbhaal loon ),
* * * * *
माँ अपने कांधों का बोझ,
कुछ मेरे कांधों पर डाल दो,
माँ देखकर नीले आसमान की ओर,
एक सिक्का हवा में उछाल दो,
माँ देखना उसे गौर से,
वो सिक्का घूम रहा है जोर-जोर से,
माँ देखना तुम इस बार,
चित भी हमारी और पट भी हमारी होगी,
खुशियों की आने वाली है बहार,
अब ना कोई लाचारी होगी,
आज से कामयाबी की ओर,
माँ,बढ़ते जाएंगे हमारे कदम,
अब खुद को थोडा विश्राम दो,
आपके कांधों का भार माँ,
चलो अब मैं संभाल लूं ( chalo ab main sanbhaal loon ),
एक दिन खुशियों पर बढ़त बना लेगें हम
* * * * *
चलो अब मैं संभाल लूं ( chalo ab main sanbhaal loon ) : चारों से मुस्कान तक

अकेले परेशानियों से माँ कब तक लड़ोगी,
माँ दुखते पाँव के साथ अकेले कब तक चलोगी,
इन पाँव को अब विश्राम दो,
खुशियों को जकड़कर चारों ओर से,
अपनी बाहों में अब थाम लो,
मत रोको,खुशी के आंसुओं को बह जाने दो,
अब खुशियों की दस्तक घर में होने दो,
खुशियों के रंग लेकर कुदरत के खजाने से,
‘जी” करता है पुरे घर में बिखेर दूं,
अब खुद को थोडा विश्राम दो,
आपके कांधों का भार माँ,
चलो अब मैं संभाल लूं ( chalo ab main sanbhaal loon ),
एक दिन खुशियों पर बढ़त बना लेगें हम
* * * * *
इन खुशियों के लिए हम बहुत तरसे हैं,
खुशियों के बादल आज हमारे आंगन में,
माँ,जमकर बरसें हैं,
मुस्कान के बादल अब अपने चेहरे पर छाने दो,
माँ खोल दो घर के द्वार सारे,
खुशियों को चारों ओर से आने दो,
माँ आपके पाँव की मिट्टी को,
लाल कपड़े में लपेटकर,
मैं अपने घर की चौखट पर बांधूंगा,
मैं हर सुबह उठकर चूमूंगा इस मिट्टी को,
जब भी घर से बाहर जाऊंगा,
खुशियां तुम्हारा माथा चूमने आएंगी,
माँ हमारे आंगन में बारिश खुशियों की,
आज से बरसेगी छम-छम,
अब खुद को थोडा विश्राम दो,
आपके कांधों का भार माँ,
चलो अब मैं संभाल लूं ( chalo ab main sanbhaal loon ),
एक दिन खुशियों पर बढ़त बना लेगें हम
* * * * *
पाँव के छाले रोक ना पाएंगे,
हमारे बढ़ते कदम,
हम जीते हैं मानकर जीवन को,
सात सूरों की सरगम,
तेरे जीवन को महकाने का,
तेरी माँ ने बेड़ा उठाया है,
तारों की भांति चमकाने का,
तेरी माँ ने बेडा उठाया है,
पाँव के छालों से हमारा नाता पुराना है,
ये एक मित्र की तरह साथ रहते हैं,
इनसे हमारा वर्षों से दोस्ताना है,
मेरे पाँव के छालों को देखकर,
तूं मत हों उदास,
इस प्यारे चेहरे पर उदासी नहीं,
अब मुस्कान की बारी है,
धरती से लेकर अंबर तक,
अब सारी कायनात हमारी है,
तारों से भरा आसमान,
चाँद की शीतल चाँदनी ,
बारिश की बूंदों की छम-छम,
अब खुद को थोडा विश्राम दो,
आपके कांधों का भार माँ,
चलो अब मैं संभाल लूं ( chalo ab main sanbhaal loon ),
एक दिन खुशियों पर बढ़त बना लेगें हम
* * * * *
crearion-राम सैणी
read more sweet poetry
click here –> मन्नत का धागा (mannat ka dhaga) : ममता की ताकत
click here –> बेटी है तो बहू है ( beti hai to bahoo hai ) : बेटी बनाम बहू
,



